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17 साल से ट्रेन का इंतजार; 490 करोड़ की आरा–मुंडेश्वरी रेल लाइन पर आमजन की उम्मीदें पटरियों से बाहर

Published: Mon, 02 Feb 2026 08:12 PM (IST)

मोहनियां (कैमूर) में आरा-मुंडेश्वरी रेल लाइन परियोजना 17 साल से अधूरी है। 2008 में लालू प्रसाद यादव द्वारा शिलान्यास के ...और पढ़ें

रेल प्रोजेक्‍ट का नक्‍शा। सांकेत‍िक तस्‍वीर

रेल प्रोजेक्‍ट का नक्‍शा। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. आरा-मुंडेश्वरी रेल लाइन परियोजना 17 साल से अधूरी।

  2. 2008 में शिलान्यास, 490 करोड़ का अनुमानित खर्च।

  3. भूमि अधिग्रहण न होने से पर्यटन विकास बाधित।

संवाद सहयोगी, मोहनियां (कैमूर)। देश के प्राचीनतम माता मुंडेश्वरी मंदिर को रेलमार्ग से जोड़ने का सपना 17 साल बाद भी अधूरा है।

आरा–मुंडेश्वरी रेल लाइन परियोजना के शुरू न होने से कैमूर जिले के लोगों में गहरी निराशा है। हर साल नया बजट नई उम्मीद लेकर आता है, लेकिन बजट पेश होते ही यह उम्मीद टूट जाती है।

रविवार को संसद में पेश केंद्रीय बजट ने भी जिलेवासियों को मायूस ही किया। 122 किलोमीटर लंबी आरा–मुंडेश्वरी रेल लाइन परियोजना का शिलान्यास 14 दिसंबर 2008 को तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने मोहनियां में किया था।

इस परियोजना पर उस समय करीब 490 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान लगाया गया था और इसे वर्ष 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था।

उद्देश्य स्पष्ट था—माता मुंडेश्वरी धाम को रेलमार्ग से जोड़कर कैमूर जिले में पर्यटन को बढ़ावा देना और पहाड़ी व दूरदराज इलाकों के लोगों को रेल सुविधा उपलब्ध कराना।

लेकिन शिलान्यास के बाद परियोजना जमीन पर आगे नहीं बढ़ सकी। भूमि अधिग्रहण तक की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। नतीजतन, आज भी माता मुंडेश्वरी मंदिर सहित जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालकों और पर्यटकों को सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है।

दिलचस्प बात यह है कि इतने लंबे समय में यह बहुप्रतीक्षित परियोजना कभी बड़ा चुनावी मुद्दा भी नहीं बन सकी। जबकि इस दौरान कैमूर जिले से विधायक और विधान पार्षद मंत्री रहे।

सासाराम से भाजपा नेता छेदी पासवान लगातार तीन बार सांसद बने। इसके बावजूद परियोजना का ठंडे बस्ते में पड़ा रहना जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर सवाल खड़े करता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह रेल लाइन बन जाती तो कैमूर जिले को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान मिलती।

रोजगार के अवसर बढ़ते, व्यापार को गति मिलती और पहाड़ी क्षेत्रों के ग्रामीणों का वर्षों पुराना सपना पूरा होता, जिन्होंने आज तक ट्रेन को सिर्फ तस्वीरों में ही देखा है।

परियोजना के नक्शे के अनुसार यह रेल लाइन आरा जंक्शन से कोचस होते हुए भभुआ रोड स्टेशन के पूरब से डीडीयू–गया रेलखंड को पार करती हुई भगवानपुर के रास्ते मुंडेश्वरी धाम तक पहुंचनी थी। लेकिन 17 साल बीत जाने के बाद भी योजना कागजों से बाहर नहीं आ सकी।

हैरानी की बात यह भी है कि डीडीयू रेल मंडल के अधिकारियों के पास यह स्पष्ट जानकारी तक नहीं है कि परियोजना के लिए कितनी भूमि का अधिग्रहण होना है और उस पर कितना खर्च आएगा।

इस संबंध में विधान पार्षद संतोष कुमार सिंह का कहना है कि वे जल्द ही रेल मंत्री से मुलाकात कर आरा–मुंडेश्वरी रेल लाइन परियोजना का मुद्दा उठाएंगे और प्रधानमंत्री को भी इसकी जानकारी देंगे। लोगों को उम्मीद है कि जनदबाव और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से यह चिरप्रतीक्षित परियोजना एक दिन जरूर धरातल पर उतरेगी।

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