प्रखंड क्षेत्र में जल संरक्षण व जल स्तर को बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर मौजूद कुएं का सर्वेक्षण बीडीओ राजेश कुमार ने कराया है। ताकि जो कुएं मरम्मत के अभाव में बर्बाद हो रहे हैं या किसी और अन्य कारण से कुएं का अस्तित्व समाप्त हो रहा है उसे बचाया जा सके, लेकिन प्राप्त आंकड़े वास्तविकता से बिल्कुल ही भिन्न हैं। सर्वे से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करे तो पूरे प्रखंड में 441 कुएं हैं। जिसमें वर्तमान समय में 221 कुओं में पानी मौजूद है एवं 220 कुएं बिल्कुल सूख गए हैं। इसे उपयोग में नहीं लाया जाता है। जबकि जिला पदाधिकारी से प्रखंड को मिले निर्देश के अनुसार वैसे कुओं का सर्वेक्षण करना था जो सार्वजनिक हैं। लेकिन यहां उनकी भी गणना की गई है जो किसी के निजी भूमि में स्थित है। अगर निजी और सार्वजनिक कुओं की वास्तविक गणना की जाए तो पूरे प्रखंड में हजारों की तादाद में कुआं होंगे। जिनमें 90 प्रतिशत से ज्यादा कुआं लोगों के द्वारा अपनी निजी भूमि में खोदवाए गए थे। जिनसे लोग अपने खेतों में सिचाई और पीने के पानी के लिए उपयोग करते थे। लेकिन वर्तमान समय में जैसे-जैसे आबादी बढ़ी बहुत से कुओं का नामोनिशान ही खत्म हो चुका है। उसे मिट्टी से पटवा कर उसका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया। किए गए सर्वेक्षण में इन बातों का कहीं जिक्र नहीं है कि पूर्व में जहां कुएं थे वर्तमान में उसका अतिक्रमण कर अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया है।

Posted By: Jagran

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