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जमुई में 70 साल बाद भी नहीं बनी 700 मीटर सड़क, पगडंडी और खेतों के सहारे स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:30 AM (IST)

जमुई के लक्ष्मीपुर प्रखंड स्थित 70 साल पुराने प्राथमिक विद्यालय तक 700 मीटर सड़क न होने से बच्चे खेतों और ...और पढ़ें

पगडंडी और खेतों के सहारे स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

पगडंडी और खेतों के सहारे स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. जमुई के कमलु में 70 साल पुराने स्कूल तक सड़क नहीं।

  2. बच्चे खेतों और पगडंडियों से होकर स्कूल पहुंचते हैं।

  3. बारिश, ठंड में बच्चों को जहरीले जीवों का भी डर।

नीरज कुमार सिंह, लक्ष्मीपुर (जमुई)। स्कूल को स्थापित हुए 70 साल बीत गए, लेकिन छोटे-छोटे बच्चों के पहुंचने के लिए 700 मीटर सड़क शिक्षा विभाग नहीं बनवा सका। बात हो रही है, जिले के लक्ष्मीपुर प्रखंड के कमलु में 1956 में बने प्राथमिक विद्यालय की। जहां, आज भी इस विद्यालय में पढ़ने के लिए आने वाले बच्चे खेत होकर स्कूल पहुंचते हैं। 

वर्षा हो या ठंड का मौसम। दोनों ही सीजन बच्चों के लिए कठिनाइयों से भरा होता है। बुधवार को भी स्कूल जा रहे बच्चों को धान की फसल के बीच बने मेड़ पर ओस के बूंद गिरने से फिसलन का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं अभिभावकों को छोटे-छोटे बच्चों के घास-झाड़ियों से होकर गुजरने के दौरान जहरीले जीव-जंतुओं का भी डर सताता है।

फिसलकर गिर रहे बच्चे, कपड़े और किताब तक खराब हो रहे 

ग्रामीणों के अनुसार, इस स्कूल में 130 बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन, विद्यालय तक पहुंचने के लिए आज तक पक्की सड़क की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। विद्यालय में नामांकित बच्चों को प्रतिदिन इसी परेशानी से जूझना पड़ता है। 

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बारिश के दिनों में खेतों में पानी भरने और पगडंडियों पर फिसलन होने से छोटे बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता। कई बार कीचड़ में फिसलकर गिरने से बच्चों के कपड़े और किताबें खराब हो जाती हैं। इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है।

जूते-चप्पल पहनकर स्कूल जाना मुश्किल: छात्र

विद्यालय के बच्चों की परेशानी उनकी जुबानी भी सामने आती है। कक्षा दो के छात्र कार्तिक मरांडी कहते हैं कि वे नियमित रूप से स्कूल आकर पढ़ना चाहते हैं, लेकिन रास्ते की परेशानी के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। 

कक्षा तीन के सत्यम कुमार बताते हैं कि सड़क नहीं होने के कारण धान के खेतों की पगडंडियों से होकर आना पड़ता है। कई बार नंगे पैर ही विद्यालय पहुंचना पड़ता है। 

कक्षा चार की बसंती कुमारी कहती हैं कि बड़े-बड़े घास और झाड़ियों के बीच से गुजरने के दौरान जहरीले जीव-जंतुओं का डर बना रहता है। वहीं, कक्षा पांच की अर्चना कुमारी का कहना है कि वे भी जूते-चप्पल पहनकर स्कूल आना चाहती हैं, लेकिन रास्ता नहीं होने के कारण ऐसा करना मुश्किल हो जाता है।

अधिकारियों से लगाई गुहार, अब कार्रवाई का इंतजार

विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रेम दत्त रेणु दास ने बताया कि उन्होंने विद्यालय में पदस्थापन के बाद से ही बच्चों के आवागमन में हो रही परेशानी से लगातार अधिकारियों को अवगत कराया है। इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी है। 

ग्रामीणों की मांग है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए विद्यालय तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि नौनिहालों को रोजाना जोखिम उठाकर स्कूल नहीं जाना पड़े।

विद्यालय तक जाने के लिए सड़क नहीं होने की जानकारी मिली है। इस समस्या को लेकर संबंधित विभाग से विद्यालय तक सड़क निर्माण कराने की लिखित मांग की जाएगी। - प्रेम प्रकाश, प्रखंड विकास पदाधिकारी, लक्ष्मीपुर।