पुल नहीं तो वोट नहीं, जमुई के जतहर में चचरी के सहारे जिंदगी, हालात देखने नदी पार पहुंचे विधायक प्रफुल्ल मांझी
जमुई के जतहर गांव में स्थायी पुल की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर है, जिन्होंने "पुल नहीं ...और पढ़ें
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जमुई के खैरा स्थित जतहर में चचरी पुल और नदी घाट का निरीक्षण करते सिकंदरा विधायक प्रफुल्ल मांझी।
HighLights
जतहर गांव में स्थायी पुल की मांग पर आक्रोश।
ग्रामीणों ने "पुल नहीं तो वोट नहीं" का नारा दिया।
विधायक प्रफुल्ल मांझी ने मौके का निरीक्षण किया।
संवाद सूत्र, खैरा (जमुई)। जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत हरनी पंचायत के जतहर गांव में नदी पर स्थायी पक्के पुल के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर पहुँच गया है। वर्षों की उपेक्षा से तंग आकर ग्रामीणों ने इस बार स्पष्ट संदेश दिया है— "पुल नहीं तो वोट नहीं"।
ग्रामीणों की इसी गंभीर समस्या और जनआक्रोश की जानकारी मिलने पर सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रफुल्ल मांझी जतहर गांव पहुँचे। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ नदी घाट का स्थलीय निरीक्षण किया और ग्रामीणों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा।
चंदा और समाजसेवी के सहयोग से टिका है चचरी का सहारा
जतहर और आसपास के गांवों के लोगों के लिए नदी पार करना किसी जोखिम भरे सफर से कम नहीं है। सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई मदद न मिलने पर ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर तथा समाजसेवी डॉ. नीरज शाह के आर्थिक सहयोग से नदी पर एक अस्थायी चचरी पुल (बांस-बल्ली का पुल) का निर्माण कराया है।

इसी चचरी पुल के सहारे ग्रामीण, स्कूली बच्चे और महिलाएं रोजमर्रा के आवागमन के लिए मजबूर हैं। मानसून के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ते ही गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट जाता है, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
कम आबादी का हवाला और ग्रामीणों की सख्त चेतावनी
निरीक्षण के दौरान विधायक प्रफुल्ल मांझी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि जतहर नदी घाट पर स्थायी पुल निर्माण के लिए डीपीआर (DPR) तैयार कराया जा चुका है।
हालांकि, क्षेत्र की कम आबादी होने का तर्क देकर विभागीय व सरकारी स्तर पर इस ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विधायक ने आश्वस्त किया कि वे इस मुद्दे को विधानसभा और शासन के समक्ष मजबूती से उठाकर पुल निर्माण के लिए अपने प्रयास जारी रखेंगे।
दूसरी ओर, ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं ने विधायक और प्रशासन के सामने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। महिलाओं ने कहा कि वे वर्षों से सिर्फ खोखले आश्वासन झेलती आ रही हैं। यदि आगामी चुनावों से पहले नदी पर पक्के पुल के निर्माण की दिशा में ठोस काम शुरू नहीं हुआ, तो पूरा गांव मतदान का बहिष्कार करेगा।
