जब नहीं सुनी किसी ने पुकार, तो ग्रामीणों ने खुद ही संवारा 'नवा आहर'; जमुई में 7 लाख के चंदे से लौटाई रंगत
चकाई बाजार का नवा आहर, जो कभी गंदगी से भरा था, अब जल संरक्षण और जनसहयोग की मिसाल बन गया ...और पढ़ें

जमुई में 7 लाख के चंदे से संवारा नवा आहर
HighLights
चकाई बाजार का नवा आहर गंदगी से भरा था, अब साफ।
ग्रामीणों ने 7 लाख रुपये चंदा और श्रमदान से किया जीर्णोद्धार।
अब 16 फीट पानी, 5000 लोगों और किसानों को लाभ।
अमित कुमार राय, चंद्रमंडी(जमुई)। कभी गंदगी, मल-मूत्र और घास-फूस से भरा रहने वाला चकाई बाजार का नवा आहर आज जल संरक्षण और जनसहयोग की मिसाल बन गया है। साल भर पहले तक लोग इसके पास से नाक पर रूमाल रखकर गुजरते थे। गाद से भरे आहर का पानी सूख चुका था और चारों ओर घास उग आई थी।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आहर को अमृत सरोवर योजना में भी शामिल नहीं किया गया था। सांसद और विधायक से गुहार लगाने के बाद भी जब ध्यान नहीं दिया गया तो बाजारवासियों ने खुद इसके जीर्णोद्धार की पहल की। ग्रामीण अमरनाथ चौधरी और कन्हैयालाल गुप्ता के नेतृत्व में बाजारवासियों ने बैठक कर आहर की सुंदरीकरण का निर्णय लिया। इसके बाद आपसी चंदा और श्रमदान से सफाई अभियान शुरू किया गया।
सात लाख रुपये से अधिक का चंदा जुटाया
लोगों ने सात लाख रुपये से अधिक का चंदा जुटाया। करीब दो महीने तक श्रमदान और एक्सकैवेटर की मदद से छह एकड़ में फैले आहर से गाद और घास-फूस हटाई गई। सफाई के बाद आहर में पानी भर गया। वर्तमान में इसमें करीब 16 फीट पानी है। अब चकाई बाजार और आसपास के करीब पांच हजार लोगों को नहाने-धोने की सुविधा मिल रही है।
आसपास के किसान भी सिंचाई के लिए आहर के पानी का उपयोग कर रहे हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करने पहुंचते हैं। मवेशियों को भी पानी उपलब्ध हो रहा है। ग्रामीणों का यह प्रयास दिखाता है कि सामूहिक पहल से लंबे समय से उपेक्षित जलस्रोत को फिर से उपयोगी बनाया जा सकता है।
मूर्तिकार के सुझाव से शुरू हुई पहल
आहर की सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अमरनाथ चौधरी ने बताया कि एक साल पहले आहर के पास स्थित दुर्गा मंदिर में प्रतिमा बनाने आए मूर्तिकार ने इसकी गंदगी पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इतने गंदे पानी में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करना उचित नहीं है और आहर की सफाई होनी चाहिए।
उनकी यह बात बाजारवासियों के दिल को छू गई। इसके बाद अमरनाथ चौधरी और कन्हैयालाल गुप्ता के नेतृत्व में बाजार के युवा और सभी वर्गों के लोग आगे आए। आपसी चंदा और श्रमदान से आहर की सफाई कराई गई।
आहर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
चकाई बाजार निवासी कन्हैयालाल गुप्ता ने बताया कि इस पुराने आहर के मेड़ से सटे राधा-कृष्ण ठाकुरबाड़ी, शिव-पार्वती मंदिर और भगवान सूर्य का मंदिर स्थित हैं। वहीं, पास में माता विषहरी मंदिर और गोला दुर्गा मंदिर भी हैं।
प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करने के बाद मंदिरों में
पूजा-अर्चना करते हैं। छठ पूजा के अवसर पर यहां विशाल गौशाला मेला और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस कारण आहर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है।
