जमुई में नाबालिगों से छेड़छाड़ का आरोपी नंदन वीआईपी वार्ड में, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
जमुई में नाबालिगों से दुर्व्यवहार के आरोपी नंदन यादव को मुठभेड़ में गोली लगने के दावे के बाद भी कैदी वार्ड के बजाय वीआईपी आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

छेड़छाड़ का आरोपी नंदन वीआईपी वार्ड में
HighLights
नाबालिगों से दुर्व्यवहार के आरोपी नंदन यादव को वीआईपी वार्ड में रखा।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
आरोपी को न्यायालय और मीडिया से दूर रखने पर संदेह गहराया।
आरके सिंह, जमुई। दो नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार से पूरे देश में जमुई को शर्मसार करने वाले मुख्य आरोपित नंदन यादव को मुठभेड़ में गोली मारने का दावा करने वाली पुलिस उसे कैदी वार्ड में रखने, कोर्ट में प्रस्तुत करके जेल भेजने की बजाय कोरोना में बनाए गए सुंदर अत्यधिक वीआईपी वार्ड में रखकर मीडिया की नजरों से बचा रही है। आखिर क्यों? यह सवाल अब लोगों को परेशान करने लगा है।
तीन दिन बीतने के बाद भी इस वक्त पुलिस की गोली से घायल होने की बात कहकर नंदन यादव को इलाज के नाम पर कैदी वार्ड की जगह सदर अस्पताल में बने कोरोना के लिए बने एसी की सुविधा वाले आइसोलेशन वार्ड रखा गया है, जहां सुरक्षा के नाम पर मीडिया को रोकने के लिए पुलिस वाले मुस्तैद रहते हैं, जैसे राजनीतिक और वीआइपी कैदियों को गेस्ट हाउस में जेल बनाकर रखा जाता है।
सिविल सर्जन ने कॉल नहीं उठाया
इस बाबत जानकारी लेने के लिए जमुई के सिविल सर्जन को कॉल लगाने पर उन्होंने कॉल बार-बार कट कर दिया। सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. थनिश कुमार से पूछने पर उन्होंने कहा कि अभी नंदन मरीज है। जब न्यायालय में प्रस्तुत होगा और कैदी बनेगा, तब कैदी वार्ड में जाएगा। ऐसा लगता है कि कानून को अब पुलिस और डॉक्टर मिलकर ही चलाने लगे हैं।
नंदन यादव को लेकर उसके गोली लगने के घाव और एनकाउंटर की बात को पुलिस मीडिया से शुरुआती दौर से बचाती रही है। अगर पुलिस ने बहादुरी का काम किया है तो इसमें छुपाने जैसा क्या है? अगर नंदन गंभीर रूप से बीमार है तो उसे बोर्ड ऑफ डॉक्टर इलाज करने के बाद कम से कम मेडिकल बुलेटिन तो जारी कर देते और अगर उसकी स्थिति अच्छी है तो उसे एंबुलेंस में ही सही, न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया जाना चाहिए था और न्यायालय जरूरी समझती तो उसे वापस चिकित्सा में डॉक्टर की देखरेख में सदर अस्पताल के कैदी वार्ड में भेजने का आदेश जारी करती, लेकिन किन कारणों से उसे न्यायालय और मीडिया दोनों से दूर रखा जा रहा है, यह पुलिस ही बेहतर बता सकती है।
इस बारे में जानकारी देने के लिए डॉक्टर तैयार नहीं मिले। हालांकि, नंदन यादव के इलाज में लगे स्वास्थ्य कर्मी के सूत्र बताते हैं कि नंदन यादव कोर्ट में प्रस्तुत होने लायक फिट है, लेकिन अभी उसे डॉक्टर द्वारा इलाज दिया जा रहा है।
पॉक्सो की विशेष अदालत में प्रस्तुत
कानून के प्रविधानों के तहत उसे पॉक्सो की विशेष अदालत में प्रस्तुत करने के बाद न्यायालय की संतुष्टि के आधार पर फिर वापस जमुई सदर अस्पताल में डॉक्टरों की चिकित्सा और देखरेख में कैदी वार्ड में रखा जा सकता था, लेकिन उसे न्यायालय मीडिया दोनों की नजरों से बचाना कहीं न कहीं कुछ संदेह तो जरूर पैदा करता है जो नंदन के सामने आने और न्यायालय में प्रस्तुत होने के बाद स्पष्ट होगा।
लापरवाही की स्थिति में कार्रवाई न्यायालय द्वारा किए जाने पर यह कार्रवाई भी ऐसी महिला पुलिस पदाधिकारी और अनुसंधानकर्ता पर होगी जो गर्भावस्था की स्थिति में है और लाचार विवश है।
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