झाझा-जसीडीह रेलखंड पर लगातार दूसरे दिन ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक, 75 मिनट के ब्लॉक से यात्री परेशान
झाझा-जसीडीह रेलखंड पर लगातार दूसरे दिन ट्रैक मेंटेनेंस के कारण ट्रेनों में देरी हुई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का ...और पढ़ें
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झाझा-जसीडीह रेलखंड पर ट्रेन का इंतजार करते परेशान दैनिक यात्री।
HighLights
झाझा-जसीडीह रेलखंड पर लगातार दूसरे दिन ट्रेनों में देरी।
शाम के व्यस्त समय में 75 मिनट का ट्रैक ब्लॉक।
यात्रियों में रेलवे की कार्यशैली के प्रति भारी आक्रोश।
संवाद सूत्र, सिमुलतला (जमुई)। झाझा-जसीडीह मुख्य रेलखंड पर सफर करने वाले रेल यात्रियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार को मेंटेनेंस कार्य के चलते घंटों ट्रेनों में फंसे रहने के बाद, सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी यात्रियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ी।
पूर्व रेलवे के आसनसोल मंडल अंतर्गत घोरपारण और सिमुलतला स्टेशन के बीच डिपार्टमेंटल मटेरियल ट्रेन (DMZ/DMT) संचालन व ट्रैक मेंटेनेंस को लेकर शाम 3:45 बजे से 5:00 बजे तक करीब 75 मिनट (सवा घंटे) का ब्लॉक लिया गया।
शाम के ठीक व्यस्त समय (पीक आवर्स) में अचानक लिए गए इस ब्लॉक के कारण डाउन लाइन पर ट्रेनों के पहिए पूरी तरह थम गए। कार्यस्थल से ठीक पहले ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोक दिए जाने से खासकर दफ्तरों से घर लौट रहे दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और आम मुसाफिरों को स्टेशनों पर लंबा इंतजार करना पड़ा।
समाचार संकलन तक ये ट्रेनें हुईं प्रभावित:
13208 डाउन (पटना - जसीडीह मेमू): अपने निर्धारित समय से 1 घंटे से भी अधिक की देरी से संचालित हुई।
63574 डाउन (किऊल - जसीडीह मेमू): करीब 50 मिनट से ज्यादा विलंब से चली।
63210 डाउन (पटना - देवघर मेमू): लगभग 1 घंटा 30 मिनट से अधिक समय तक लेट हो चुकी थी।
यात्रियों में रेलवे की कार्यशैली के प्रति आक्रोश
गौरतलब है कि बीते रविवार को सिमुलतला और लहाबन के बीच मेंटेनेंस ब्लॉक के कारण यही मेमू ट्रेनें घंटों फंसी रही थीं। अभी यात्री उस झटके से पूरी तरह संभल भी नहीं पाए थे कि सोमवार शाम फिर 75 मिनट के ब्लॉक ने वही स्थिति दोहरा दी।

शाम के वक्त घर लौटने की जल्दी में झाझा, नरगंजो, घोरपारण, टेलवा बाजार हाल्ट, सिमुलतला और लहाबन स्टेशनों पर फंसे यात्रियों में रेलवे की लचर व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी देखी गई।
यात्रियों का दो टूक कहना था कि रेलवे को ट्रैक मेंटेनेंस का काम या तो देर रात (नन-पीक आवर्स) में कराना चाहिए या फिर इसकी पुख्ता सूचना पहले से देनी चाहिए, ताकि आम जनता समय पर अपनी वैकल्पिक व्यवस्था कर सके। लगातार दूसरे दिन शाम के वक्त ब्लॉक लिए जाने से पूरे रेलखंड पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
