Jamui News: झाझा आदर्श थाने पर दाग! बालू कारोबार के आरोपों में घिरे थानाध्यक्ष लाल बहादुर
झाझा थाने के थानाध्यक्ष लाल बहादुर सिंह पर अवैध बालू खनन को संरक्षण देने और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगे ...और पढ़ें

झाझा आदर्श थाने पर दाग! बालू कारोबार के आरोपों में घिरे थानाध्यक्ष लाल बहादुर

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संवाद सूत्र, झाझा (जमुई)। सफेद बालू के अवैध खनन के खेल को लेकर आदर्श थाना, झाझा इन दिनों चर्चाओं में है। महज दो माह पहले पुलिस निरीक्षक लाल बहादुर सिंह ने थानाध्यक्ष के रूप में योगदान दिया था।
उनकी गिनती तेज-तर्रार पुलिस अधिकारियों में होती थी, जिसका प्रभाव थाना के कार्यों में भी दिखाई दे रहा था, लेकिन उनकी इस छवि के पीछे पैसे की उगाही और अवैध वसूली से जुड़ी बातें सामने आते ही अब उनकी चर्चा एक भ्रष्ट अधिकारी के रूप में होने लगी है।
बताया जाता है कि इलाके में सफेद बालू के कारोबार को ध्यान में रखते हुए उन्होंने झाझा थाना में अपनी पोस्टिंग कराई थी। एक माह तक क्षेत्र की स्थिति का आकलन करने के बाद अवैध बालू खनन को संरक्षण देने की रणनीति बनाई गई।
इसके लिए एक-दो निजी चालकों को लगाया गया तथा इसकी निगरानी की जिम्मेदारी थाना के चालक जितेंद्र कुमार को सौंपी गई थी। थानाध्यक्ष का संरक्षण मिलते ही सिपाही सह चालक सक्रिय हो गया और मोबाइल के माध्यम से ट्रैक्टर मालिकों से सौदेबाजी शुरू कर दी। बालू के अवैध उत्खनन के लिए करीब तीन दर्जन ट्रैक्टर मालिकों ने चालक से संपर्क साधना शुरू कर दिया।
बताया जाता है कि यह खेल करीब एक सप्ताह से चल रहा था। खुलेआम अवैध उत्खनन शुरू होते ही यह ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इसके साथ ही थानाध्यक्ष की स्वच्छ छवि की भी पोल खुल गई। सूत्रों के अनुसार, दिन-रात बालू का अवैध उठाव किया जा रहा था।
वहीं, विशेष निगरानी इकाई की टीम के हत्थे चालक जितेंद्र कुमार के चढ़ने के बाद अवैध वसूली में सहयोग कर रहे निजी चालकों में हड़कंप मच गया। कई चालकों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए। वहीं, थानाध्यक्ष के करीबी माने जाने वाले कुछ पुलिस कर्मियों के चेहरे की रौनक भी गायब दिखाई दी।
थानाध्यक्ष के गायब होते ही एसडीपीओ ने संभाली कमान
विशेष निगरानी इकाई की टीम द्वारा चालक जितेंद्र कुमार को 12 हजार रुपये रिश्वत की राशि के साथ गिरफ्तार किए जाने के बाद थानाध्यक्ष लाल बहादुर सिंह तत्काल भूमिगत हो गए। जब उनकी तलाश शुरू हुई तो पता चला कि वह झाझा से बाहर निकल चुके हैं।
स्थिति को देखते हुए एसडीपीओ राजेश कुमार पुलिस बल के साथ तत्काल थाना पहुंचे और थाना की कमान अपने हाथ में ले ली। करीब तीन घंटे तक थाना बिना थानाध्यक्ष के संचालित होता रहा। एसडीपीओ देर रात तक थाना में कैंप कर स्थिति की निगरानी करते रहे।
इस दौरान निगरानी इकाई की पांच सदस्यीय टीम देर शाम थाना पहुंच कई बिंदुओं पर जानकारी ली। दो घंटे तक चले इस जांच में थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी से पूछताछ की गई। कई के मोबाइल नंबर भी लिए।
इस दौरान एसडीपीओ ने निगरानी टीम के सदस्यों को सहयोग किया। फिलहाल, पुलिस पदाधिकारियों में भय व्याप्त है। वहीं, बुधवार की दोपहर तक थानाध्यक्ष का सरकारी ओर प्राइवेट मोबाइल नंबर बंद रहा।
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