झाझा-बंशीपुर रेलखंड पर 42 करोड़ से बनेंगे 4 लाइट ROB और 11 LHS; बंद होंगे रेलवे फाटक, बिहार सरकार की रोड से लिंक
Jhajha Bansipur Rail Section 4 Light ROB 11 LHS Construction: झाझा-बंशीपुर रेलखंड पर 42 करोड़ की लागत से 4 लाइट ...और पढ़ें

Jhajha Bansipur Rail Section 4 Light ROB 11 LHS Construction
HighLights
झाझा-बंशीपुर रेलखंड पर 4 आरओबी और 11 एलएचएस बनेंगे।
परियोजना की कुल अनुमानित लागत 42 करोड़ रुपये है।
रेलवे फाटकों पर जाम से मुक्ति मिलेगी, आवागमन सुगम होगा।
संवाद सूत्र, झाझा (जमुई)। Jhajha Bansipur Rail Section 4 Light ROB 11 LHS Construction: पूर्व मध्य रेल अंतर्गत व्यस्ततम हावड़ा-पटना मुख्य रेलखंड को चार लाइनों में विस्तारित करने की महात्वाकांक्षी योजना ने रफ्तार पकड़ ली है। इसी कड़ी में झाझा सेक्शन के झाझा-बंशीपुर रेलखंड पर ट्रेनों के सुगम परिचालन और रेलवे समपार फाटकों पर लगने वाले भीषण जाम से निजात दिलाने के लिए रेलवे ने मास्टर प्लान तैयार किया है।
रेलखंड के अलग-अलग चिन्हित समपार फाटकों और संवेदनशील क्रासिंग पर चार लाइट रोड ओवरब्रिज (आरओबी) और 11 लिमिटेड हाइट सब-वे (एलएचएस) का निर्माण किया जाएगा। इन पुलों और सब-वे के तैयार होने के बाद रेल फाटकों को स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा, जिससे ट्रेनों के गुजरने के दौरान वाहनों और राहगीरों को फाटक खुलने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रेलवे द्वारा इन निर्माण कार्यों के लिए निविदा (टेंडर) की औपचारिक प्रक्रिया संपन्न कर ली गई है।
संवेदक एजेंसी ने चिन्हित स्थलों की नापी (पैमाइश) का कार्य शुरू कर दिया है, जिसके तुरंत बाद मिट्टी की जांच (सॉइल टेस्टिंग) कराई जाएगी। इस कवायद से स्थानीय लोगों में भारी उत्साह है।
छोटे वाहनों को सुरक्षित रास्ता
प्रस्तावित लाइट आरओबी और एलएचएस मुख्य रूप से छोटे वाहनों और आम नागरिकों की सुगम आवाजाही को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। लाइट आरओबी से पैदल यात्रियों के साथ-साथ साइकिल, दोपहिया, ई-रिक्शा और ऑटो रिक्शा निर्बाध गति से पार हो सकेंगे। वहीं, एलएचएस (अंडरपास) के जरिए रेलवे ट्रैक के नीचे से छोटी गाड़ियां बिना किसी रुकावट के गुजरेंगी।
राज्य सरकार की सड़कों से जुड़ेंगे सभी आरओबी
वित्तीय आकलन के अनुसार, एक लाइट आरओबी के निर्माण पर करीब 2.25 करोड़ रुपये खर्च होंगे, यानी चार आरओबी पर करीब 9 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। वहीं, प्रत्येक एलएचएस के निर्माण पर लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत आएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी 15 नए स्ट्रक्चर बिहार सरकार के मौजूदा ग्रामीण एवं संपर्क पथों से सीधे जुड़ेंगे, जिससे गांवों और नजदीकी बाजारों के बीच कनेक्टिविटी काफी मजबूत हो जाएगी।
जानिए किन-किन रेल पोलों के पास होगा निर्माण
विभागीय रूपरेखा के तहत चार लाइट आरओबी का निर्माण झाझा-दादपुर रेलखंड के मध्य पोल संख्या 367/21-23, 369/15-17, 367/37-39 और 372/9-11 के समीप किया जाएगा। इनमें बाराजोर के निकट दो, जबकि रानीकुरा और संसारपुर के समीप एक-एक आरओबी स्थापित होगा।
झाझा-बंशीपुर रेल इंफ्रास्ट्रक्चर
परियोजना: 4 लाइट रोड ओवरब्रिज (ROB) एवं 11 लिमिटेड हाइट सब-वे (LHS)।
अनुमानित कुल लागत: लगभग ₹42 करोड़ (₹2.25 करोड़ प्रति आरओबी, ₹3 करोड़ प्रति एलएचएस)।
आरओबी स्थल (झाझा-दादपुर): पोल सं. 367/21-23, 369/15-17, 367/37-39 (बाराजोर के पास 2) और 372/9-11 (रानीकुरा व संसारपुर)।
एलएचएस स्थल (11 लोकेशन): चौरा-जमुई (2), जमुई-कुंदर (3), कुंदर-भलुई (3) तथा मननपुर-बंशीपुर (3)।
वर्तमान स्थिति: टेंडर आवंटित, एजेंसी द्वारा स्थल पैमाइश व मिट्टी जांच (सॉइल टेस्टिंग) की प्रक्रिया जारी।
वहीं, 11 एलएचएस के निर्माण के लिए चौरा-जमुई के बीच पोल संख्या 388/11-13 एवं 390/11-13 (दो स्थान), जमुई-कुंदर के बीच 394/25-27, 395/27-29 एवं 397/11-13 (तीन स्थान), कुंदर-भलुई के बीच 399/11-13, 400/25-27 एवं 401/29-31 (तीन स्थान) और मननपुर-बंशीपुर के बीच 408/15-17, 410/9-11 एवं 411/5-7 (तीन स्थान) का चयन किया गया है।
30 मिनट के जाम से मुक्ति
वर्तमान में मुख्य रेल लाइन व्यस्त होने के कारण बाराजोर, रानीकुरा, संसारपुर, जमुई और चौरा रेलवे फाटकों पर गाड़ियों को 20 से 30 मिनट तक रोके रखना पड़ता है। इससे एंबुलेंस, छात्र और दैनिक यात्री जाम में फंसे रहते हैं। इसके अलावा कई ग्रामीण जान जोखिम में डालकर अनधिकृत रूप से ट्रैक पार करते थे, जिससे हादसों का अंदेशा बना रहता था।
नागी पक्षी आश्रयणी के पर्यटकों को सीधा फायदा
आरओबी और एलएचएस बनने से न सिर्फ हादसों पर पूर्ण विराम लगेगा, बल्कि झाझा स्थित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नागी पक्षी आश्रयणी आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को भी आवागमन में बड़ी सहूलियत होगी। अब पर्यटकों को फाटक बंद होने के कारण बेवजह समय नहीं गंवाना पड़ेगा।
"हावड़ा-पटना रूट पर चार लाइन विस्तार के साथ समपार फाटकों को मानवरहित और सुरक्षित बनाने की दिशा में यह कार्य हो रहा है। आरओबी और एलएचएस बनने से परिचालन संरक्षा और गति दोनों में इजाफा होगा।"
— सरस्वती चंद्र, मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी, पूर्व मध्य रेल, हाजीपुर
