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बिहार में अब किताबों के साथ कानून भी पढ़ेंगे बच्चे, ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ से जानेंगे अधिकार और सुरक्षा के उपाय

Published: Sun, 25 Oct 2026 07:17 PM (IST)

जमुई जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में बच्चों को यौन उत्पीड़न, शोषण और डिजिटल खतरों से बचाने के लिए 'सुरक्षित बचपन अभियान' चलाया जाएगा।

एआई जनरेटेड फोटो

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HighLights

  1. जमुई में 'सुरक्षित बचपन अभियान' सभी स्कूलों में चलेगा।

  2. बच्चों को यौन उत्पीड़न, डिजिटल खतरों से बचाया जाएगा।

  3. पॉक्सो एक्ट, गुड टच-बैड टच की जानकारी दी जाएगी।

संवाद सूत्र, जमुई। जिले के बच्चों को यौन उत्पीड़न, शोषण और डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से जमुई के सभी सरकारी, अनुदानित एवं निजी विद्यालयों में 'सुरक्षित बचपन अभियान' चलाया जाएगा।

इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) जमुई ने पत्रांक-1790 जारी करते हुए सभी संबंधित विद्यालय प्रधानों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह अभियान जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), जमुई के सचिव के पत्रांक-606 के आलोक में आयोजित किया जा रहा है।

इसके तहत छात्र-छात्राओं को व्यक्तिगत सुरक्षा, ऑनलाइन फ्रॉड व बुलिंग से बचाव, बच्चों के अनुकूल कानूनी सहायता, बाल संरक्षण नियमों और पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के बारे में व्यावहारिक व आसान भाषा में जागरूक किया जाएगा।

प्रथम चरण में 200 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूल होंगे कवर

अभियान के प्रथम चरण की शुरुआत 26 अक्टूबर से हो रही है, जो 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। पहले चरण में उन विद्यालयों को प्राथमिकता दी गई है जहाँ नामांकित विद्यार्थियों की संख्या 200 या उससे अधिक है।

इन विद्यालयों में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के न्यायिक पदाधिकारी और विषय विशेषज्ञ स्वयं पहुँचकर बच्चों के साथ संवाद स्थापित करेंगे और उन्हें 'गुड टच-बैड टच' का फर्क समझाने के साथ-साथ कठिन परिस्थितियों में आत्मरक्षा (Self Defense) के तरीके भी सिखाएंगे।

डीईओ ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जिले के सभी संबंधित प्रभारी प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अभियान के दौरान स्कूलों में पहुँचने वाले न्यायिक व अन्य उच्च पदाधिकारियों के प्रोटोकॉल का पूरी निष्ठा से पालन किया जाए।

साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर शिक्षा विभाग और विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा पूर्व-निर्धारित प्रारूप के अनुसार बैनर लगाना सुनिश्चित करें, ताकि जागरूकता का यह संदेश सभी छात्र-छात्राओं तक प्रभावी ढंग से पहुँच सके।

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