जर्जर रेलिंग के सहारे सांसें गिन रहा पत्नेश्वर किऊल नदी का पुल, नरियाना पुल टूटने से बढ़ा वाहनों का दबाव
जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर पत्नेश्वर किऊल नदी का पुल जर्जर हालत में है, जिसकी रेलिंग टूट चुकी है और बड़े ...और पढ़ें

HighLights
पुल की कंक्रीट रेलिंग जर्जर, लोहे की छड़ें बाहर निकलीं।
नरियाना पुल क्षतिग्रस्त होने से पत्नेश्वर पुल पर बढ़ा वाहनों का दबाव।
स्थानीय लोगों ने तत्काल मरम्मत और सुरक्षा जांच की मांग की।
संवाद सूत्र, बरहट (जमुई)। जमुई-मलयपुर मुख्य मार्ग पर पत्नेश्वर धाम के समीप किऊल नदी पर बना पुल इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का दंश झेल रहा है।
पुल की सुरक्षा के लिए लगाई गई कंक्रीट की रेलिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। कई जगहों से कंक्रीट उखड़ चुका है और लोहे की छड़ें बाहर निकल आई हैं, जिससे यहां हर समय एक बड़े हादसे का खतरा मंडराता रहता है।
यह पुल सामरिक और यातायात की दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल जमुई रेलवे स्टेशन को जिला मुख्यालय से जोड़ता है, बल्कि भागलपुर, बांका, देवघर और मुंगेर जाने वाले भारी एवं हल्के वाहनों का प्रमुख जरिया भी है।
नरियाना पुल के क्षतिग्रस्त होने से बढ़ा दबाव
हाल ही में नरियाना पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण वहां से आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। ऐसे में जमुई और आसपास के जिलों का सारा ट्रैफिक इसी पत्नेश्वर किऊल नदी पुल पर डायवर्ट हो गया है। वाहनों की आवाजाही अचानक कई गुना बढ़ जाने से इस पुराने पुल पर क्षमता से अधिक दबाव पड़ रहा है।
पुल की जर्जर रेलिंग की स्थिति इतनी खतरनाक हो गई है कि रात के समय या तेज गति से गुजरने वाली गाड़ियों के अनियंत्रित होने पर सीधे नदी में गिरने का डर बना रहता है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि सही समय पर नियमित रखरखाव न होने की वजह से पुल का ढांचा धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है।
लोगों ने की शीघ्र मरम्मत की मांग
स्थानीय निवासी बच्चू तांती, संजय मंडल, मनोहर यादव, आलोक कुमार आदि ने बताया कि वर्ष 1949 में किउल नदी में आई भयानक बाढ़ के बाद खैरा के राजा रामनारायण सिंह द्वारा बनाया गया लोहे का पुल ध्वस्त हो गया था।
उसके बाद यह पुल 1960 के दशक में बना था। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्नेश्वर पुल की जर्जर रेलिंग की अविलंब मरम्मत कराई जाए।
साथ ही पुल की भार क्षमता एवं तकनीकी स्थिति की जांच कर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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