अब्बू रहे यथावत; बदल गई अम्मा, पासपोर्ट बनवाने में फर्जीवाड़े का जमुई में खुलासा
जमुई में एक व्यक्ति ने फर्जी कागजात के आधार पर तीसरा पासपोर्ट बनवाने का प्रयास किया, जिसमें उसने अपनी मां का नाम और जन्मतिथि बदल दी।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
जमुई में फर्जी कागजात से तीसरा पासपोर्ट बनवाने का प्रयास।
आवेदक ने मां का नाम और जन्मतिथि में बदलाव किया।
पासपोर्ट कार्यालय ने पकड़ा, मामला दर्ज कर जांच जारी।
अरविंद कुमार सिंह, जमुई। जिले जमुई में एक आवेदक के फर्जी कागजात के आधार पर तीसरा पासपोर्ट बनवाने का मामला सामने आया है। तीसरा पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदक ने फार्म में जो नाम और अन्य जानकारियां भरी, उससे वो पकड़ में आ गया।
दरअसल आवेदक ने अपने अब्बू का नाम पुराना ही रखा और अम्मा का नाम बदल दिया। इस गड़बड़ी को पासपोर्ट कार्यालय ने पकड़ा और आवेदक वसी पर मुकदमा दर्ज कराया।
चंद्रदीप थाना में केस दर्ज कर जांच की जा रही है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा और पासपोर्ट अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की गई है।
नाम और जन्मतिथि में बदलाव
पुलिस के अनुसार जमुई जिला निवासी मु. वसी की अप्लीकेशन में अब्बू का नाम तो यथावत रहा, लेकिन चार साल में अम्मा बदल गई।
अंतर तो जन्मतिथि में भी आ गया और 53 साल का वसी 43 का हो गया। उसके पास दो पासपोर्ट पहले से था, जुलाई 2026 में मु. वसी ने तीसरे के लिए आवेदन कर दिया।
पासपोर्ट कार्यालय ने अभिलेखों के सत्यापन के दौरान पूर्व में जारी पासपोर्ट से उसका विवरण मिलाया तो व्यक्तिगत विवरण में अंतर मिला। इसके बाद संबंधित पासपोर्ट प्राधिकार ने कार्रवाई के लिए जमुई पुलिस को पत्र भेजा।

जांच में सामने आया कि 27 अप्रैल 2017 को जारी पासपोर्ट में मु. वसी की जन्मतिथि 15 दिसंबर 1973, जन्मस्थान चंद्रदीप, पिता का नाम मु. आलम और माता (अम्मा) का नाम रेहाना खातून दर्ज है।
15 अप्रैल 2021 को जारी पासपोर्ट में जन्मतिथि 10 मई 1983, जन्मस्थान चंद्रदीप, पिता का नाम मु. आलम और माता का नाम रोशन खातून दर्ज है। यानी दोनों पासपोर्ट में जन्मतिथि में करीब 10 वर्ष तथा मां के नाम का अंतर है।
फर्जीवाड़ा कर बनवाए तीन पासपोर्ट
दर्ज FIR में कहा गया है कि अलग-अलग जन्मतिथि और अन्य व्यक्तिगत विवरण का उपयोग कर दो पासपोर्ट प्राप्त किए गए।
बाद में जुलाई 2026 में फिर पासपोर्ट हासिल करने के लिए आवेदन किया गया। पासपोर्ट कार्यालय से प्राप्त पत्र और अभिलेखों के आधार पर चंद्रदीप थाने में 24 सितंबर 2026 को केस दर्ज किया गया।
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