1 अक्टूबर से बदल गया जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन का नियम, अब देरी पड़ेगी भारी; समझें कब किसकी मंजूरी जरूरी
केंद्र सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 लागू कर दिया है, जिससे अब जन्म या मृत्यु के एक वर्ष ...और पढ़ें

जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र का नया नियम लागू।
HighLights
जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 लागू हुआ।
एक वर्ष बाद पंजीकरण पर DM/SDM की मंजूरी अनिवार्य।
दो वर्ष बाद प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी।
पवन कुमार मिश्र, पटना। Birth and Death Certificate: बच्चे जन्म या किसी अपने की मृत्यु का पंजीयन टालने की आदत अब बड़ी परेशानी बन सकती है।
केंद्र सरकार ने गुरुवार से जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 लागू कर दिया है। केंद्रीय पोर्टल समेत कई राज्यों में इसके अनुरूप बदलाव हो चुके हैं और जल्द ही इसे प्रदेश में भी लागू किया जाएगा।
इसके बाद आसान दिखने वाला यह काम कागजों-मंजूरियों के जाल में उलझ सकता है। यदि जन्म या मृत्यु के एक वर्ष के बाद अब पंजीयन कराने का आवेदन देते हैं तो बिना DM या SDM की मंजूरी के यह पोर्टल पर अपलोड नहीं होगा।
2 वर्ष के पहले तक डीएम-एसडीएम, इसके बाद प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति होगी जरूरी
वहीं, दो वर्ष या इसके बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी। यही नहीं, प्रशासनिक व न्यायिक अधिकारी जन्म-मृत्यु की सत्यता की जांच कराने के बाद ही अनुमति देंगे।
इसके लिए निर्धारित शुल्क आवेदन को देना होगा। राहत की बात यह है कि 21 दिन के भीतर आवेदन करने पर बिना शुल्क सात दिन में प्रमाणपत्र देने की आसान प्रक्रिया जारी रहेगी।
वहीं, एक वर्ष तक शपथपत्र के साथ आवेदन करने पर भी पुरानी व्यवस्था भी जारी रहेगी। कुल मिलाकर अब जन्मतिथि में हेरफेर या वर्षों बाद मनमाने तरीके से रिकार्ड बनवाने की राह काफी जटिल हो जाएगी।
समय पर पंजीयन सबसे आसान रास्ता
जन्म-मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार को देनी होती है। इसके बाद मामला विलंबित पंजीकरण की श्रेणी में चला जाता है और विलंब शुल्क के अलावा अलग प्रक्रिया का प्रावधान है।
जन्म-मृत्यु के तुरंत बाद पंजीकरण के लिए पटना नगर निगम क्षेत्र में अस्पतालों व घाटों पर तो ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत सचिव के पास पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
नूतन राजधानी अंचल के रजिस्ट्रार राजीव रंजन पांडेय के अनुसार पारस एचएमआरआइ, मेदांता जयप्रभा, मेडिवर्सल और कुर्जी जैसे बड़े अस्पतालों को ऑनलाइन आवेदन के लिए लागिन आइडी दी गई है।
दीघा, बांसघाट, गुलबीघाट, महावीर समेत कई घाटों पर भी नगर निगम के कर्मचारी तैनात हैं। मृत्यु के बाद दाह-संस्कार के समय सूचना देने पर प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था है।
नए नियम लागू होने से पहले लंबित मामलों का होगा निपटारा
एक अक्टूबर से नए प्रविधान लागू हो गए हैं। प्रदेश में इसे लागू करने के पहले जन्म-मृत्यु पंजीयन हजारों लंबित मामलों को पुराने नियमों के तहत निपटाना होगा।
नए नियम के प्रभावी होने के बाद प्राप्त होने वाले विलंबित आवेदनों पर संशोधित व्यवस्था लागू होगी। यानी जिन लोगों ने नए नियम लागू होने से पहले पंजीयन के लिए आवेदन कर रखा है, उन्हें नए प्रविधानों के कारण दोबारा पूरी प्रक्रिया नहीं करनी होगी।
| पंजीकरण में देरी की अवधि | वर्तमान नियम | नए नियम |
|---|
| 21 दिन तक | अस्पताल, घाट, पंचायत सचिव आदि में आवेदन; तुरंत और निशुल्क पंजीकरण | कोई बदलाव नहीं |
| 21 दिन से 1 वर्ष तक | प्रखंड व नगर निकाय में आवेदन; प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी के स्तर से प्रक्रिया | कोई बदलाव नहीं |
| 1 से 2 वर्ष तक | ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ, शहरी क्षेत्र में ईओ | डीएम या एसडीएम की अनुमति जरूरी |
| 2 वर्ष से अधिक | ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ, शहरी क्षेत्र में ईओ | प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी; जन्म-मृत्यु की सत्यता की जांच और निर्धारित शुल्क देना होगा |
जन्म-मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 नियमावली का अध्ययन किया जा रहा है। जो बदलाव हुए हैं, उनके अनुपालन, अधिकारियों को जिम्मेदारी समेत कई बदलाव की जरूरत होगी। इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर एसओपी जारी कर उसे प्रदेश में लागू कराया जाएगा।
अरविंद कुमार, संयुक्त निदेशक जन्म-मृत्यु पंजीयन
