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अभावों के अंधेरे से लखपति दीदी तक का सफर, जमुई की नीलम ने 4 कारोबार से बदली तकदीर, 5 परिवारों को दिया रोजगार

Published: Tue, 13 Oct 2026 08:58 AM (IST)

जमुई की नीलम कुमारी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और जीविका मिशन से जुड़कर अभावों से निकलकर सफलता की नई कहानी लिखी है।

अपने कपड़े की दुकान में खड़ीं लखपति दीदी नीलम कुमारी।

अपने कपड़े की दुकान में खड़ीं लखपति दीदी नीलम कुमारी।

HighLights

  1. जीविका मिशन से जुड़कर नीलम ने शुरू किया व्यवसाय।

  2. चार सफल कारोबारों से सालाना 5 लाख की कमाई।

  3. 'लखपति दीदी' ने 5 स्थानीय लोगों को दिया रोजगार।

विश्वजीत सिंह विक्की, बरहट (जमुई)। मजबूत इच्छाशक्ति, अटूट लगन और सही दिशा में उठाया गया एक सकारात्मक कदम किसी भी इंसान की तकदीर बदल सकता है।

जमुई जिले के बरहट प्रखंड अंतर्गत सलैया गांव की रहने वाली नीलम कुमारी ने अपनी मेहनत से इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है। अभावों और तंगहाली के अंधेरे को चीरकर 'जीविका दीदी' के रूप में अपनी एक नई और विशिष्ट पहचान बनाने वाली नीलम आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं।

कभी एक छोटी-सी शृंगार की दुकान से अपना कारोबारी सफर शुरू करने वाली नीलम आज रेडिमेड कपड़े, फुटवियर, प्रसाधन और ब्यूटी पार्लर जैसे चार अलग-अलग सफल व्यवसायों की मालकिन हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी ग्रामीण क्षेत्र की हर उस महिला के लिए एक बेहतरीन मिसाल है, जो विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपने परिवार के लिए कुछ बड़ा करना चाहती हैं।

वर्ष 2012 में विवाह के बंधन में बंधने वाली 8वीं पास नीलम के शुरुआती दिन अत्यधिक आर्थिक संकट और संघर्षों में बीते। परिवार में संसाधनों का भारी अभाव था, लेकिन घर की स्थिति सुधारने का जज्बा उनके भीतर हमेशा ज्वलंत रहा।

उनके जीवन में बदलाव की नई सुबह वर्ष 2020 में आई, जब वह बिहार सरकार के जीविका मिशन के तहत 'शक्ति स्वयं सहायता समूह' से जुड़ीं। समूह की नियमित बैठकों ने उन्हें वित्तीय प्रबंधन और छोटी-छोटी बचत की समझ दी, जिसने उनके भीतर छिपी उद्यमी क्षमता को बाहर निकाला।

जीविका ऋण और व्यावसायिक सूझ-बूझ से बदली स्थिति; एक छत के नीचे उपलब्ध कराईं कई सुविधाएं

अपने पैरों पर खड़े होने के दृढ़ संकल्प के साथ नीलम ने समूह और 'कंगना ग्राम संगठन' के माध्यम से कुल 1.40 लाख रुपये का ऋण लिया। इस पूंजी से उन्होंने गांव में ही शृंगार की एक छोटी-सी दुकान खोली।

Jamui' Neelam Kumari From Struggle to Lakhpati Didi Success (1)

ग्रामीण महिलाओं की जरूरतों को गहराई से समझते हुए उन्होंने महसूस किया कि छोटी-छोटी खरीदारी और पार्लर सेवाओं के लिए महिलाओं को दूर-दराज के दूरस्थ शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।

इसी व्यावसायिक सूझ-बूझ का लाभ उठाते हुए उन्होंने अपनी दुकान में रेडिमेड कपड़े, जूते-चप्पल और ब्यूटी पार्लर की सामग्री भी शामिल कर दी। इसी बीच 'मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना' के तहत मिली 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि ने उनके व्यापार को और मजबूती प्रदान की।

सालाना आय 5 लाख के पार; 5 अन्य परिवारों का सहारा बनीं लखपति दीदी

आज नीलम की अनवरत मेहनत का सुखद परिणाम सबके सामने है। उनकी मासिक आमदनी 40 हजार रुपये यानी सालाना करीब 5 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण बेहतर ढंग से कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी संबल बन चुकी हैं।

उन्होंने अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर 5 स्थानीय लोगों को रोजगार दे रखा है, जिन्हें वे प्रतिमाह 8 हजार रुपये का वेतन देती हैं। इस तरह वे प्रत्यक्ष रूप से 5 अन्य परिवारों की आजीविका चलाने में मदद कर रही हैं। समाज में आए इस बड़े बदलाव ने उन्हें 'लखपति दीदी' के सम्मान से नवाजा है।

अपनी खुद की कमाई के बल पर नीलम आज अपने 12 साल के बेटे और 10 साल की बेटी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला रही हैं। उनकी इस बड़ी सफलता में उनके पति गोरेलाल मंडल का निरंतर सहयोग रहा है।

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए नीलम पूरे आत्मविश्वास से कहती हैं कि वे अपने व्यवसाय को और विस्तृत कर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एक बड़ा ब्यूटी पार्लर खोलना चाहती हैं।

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