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जमुई बैड टच कांड : मजिस्ट्रेट के सामने छात्रा का बयान दर्ज, FIR से पीड़ित छात्र का नाम गायब

Published: Thu, 24 Sep 2026 08:09 PM (IST)Updated: Thu, 24 Sep 2026 08:42 PM (IST)

Jamui Minor Abuse Case Victim 164 Statement : नाबालिग दुर्व्यवहार मामले में पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के ...और पढ़ें

Jamui Minor Abuse Case Victim 164 Statement : प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

Jamui Minor Abuse Case Victim 164 Statement : प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

HighLights

  1. पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 बयान दर्ज।

  2. परिजनों ने मेडिकल परीक्षण कराने से साफ इनकार किया!

  3. पुलिस अनुसंधान और मुख्य आरोपी की पेशी पर सवाल।

संवाद सहयोगी, जमुई। Jamui Minor Abuse Case Victim 164 Statement : देश-दुनिया में सुर्खियों में आए जमुई जिले के मड़वा गांव स्थित नाबालिग छात्र-छात्रा दुर्व्यवहार कांड में गुरुवार को कानूनी और चिकित्सीय स्तर पर बड़ा घटनाक्रम सामने आया।

पुलिस अनुसंधानकर्ता (आईओ) सह महिला दारोगा रूबी कुमारी ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच नाबालिग पीड़िता को पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे की अदालत में प्रस्तुत किया।

विशेष अदालत के आदेश पर पीड़िता को न्यायिक दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) के समक्ष भेजा गया, जहां उसने बंद कमरे में धारा 164 के तहत अपना गोपनीय बयान दर्ज कराया।

अदालत में बयान दर्ज कराने के तुरंत बाद घटना के छठे दिन गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे पुलिस टीम बेहद सतर्कता और गोपनीयता के साथ पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंची।

अस्पताल में बाकायदा पीड़िता का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) कराया गया और उसे महिला चिकित्सक के कक्ष में ले जाया गया। पुलिस की यह पूरी कार्रवाई इतनी सधे और गोपनीय अंदाज में हुई कि छात्रा के अस्पताल पहुंचने की खबर तो मीडियाकर्मियों को मिली।

लेकिन पुलिस कब और किस रास्ते से छात्रा को बाहर निकाल ले गई, इसकी भनक तक नहीं लग सकी। नतीजतन, तमाम मीडियाकर्मी सदर अस्पताल के मुख्य द्वार पर ही इंतजार करते रह गए।

परिजनों के इनकार से मेडिकल न होने की चर्चा

अस्पताल परिसर में हुई इस गुप्त कवायद के बाद पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण हो सका या नहीं, इसे लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

अस्पताल प्रशासन या पुलिस महकमे की ओर से मेडिकल जांच संपन्न होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अनुसंधान व अदालती प्रक्रिया

  • केस संदर्भ: जमुई थाना कांड संख्या 428/2026 (नाबालिग पीड़िता के पिता के बयान पर दर्ज)।

  • अदालती कार्रवाई: धारा 164 के तहत न्यायिक दंडाधिकारी (मजिस्ट्रेट) के समक्ष बंद कमरे में बयान दर्ज।

  • जांच अधिकारी (IO): पुलिस अवर निरीक्षक रूबी कुमारी (जमुई थाना)।

  • अस्पताल की स्थिति: घटना के छठे दिन दोपहर 12 बजे के बाद सदर अस्पताल में रजिस्ट्रेशन कराया गया।

  • मेडिकल पर संशय: आधिकारिक पुष्टि नहीं; परिजनों द्वारा मेडिकल कराने से इनकार करने की बात सामने आई।

  • अनुसंधान में विसंगति: एफआईआर में स्कूटी सवार साथी छात्र के परिजनों व पते का विवरण गायब, मुख्य आरोपित नंदन की पेशी लंबित।

विश्वस्त सूत्रों के हवाले से ऐसी बातें सामने आ रही हैं कि पीड़िता के परिजनों ने उसका मेडिकल परीक्षण कराने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते महिला चिकित्सकों की टीम जांच प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी। इस संवेदनशील बिंदु पर प्रशासनिक और पुलिस स्तर के अधिकारी कुछ भी स्पष्ट बोलने से बच रहे हैं।

FIR में साथी छात्र का ब्योरा गायब

दूसरी ओर, इंटरनेट मीडिया पर वीडियो प्रसारित होने के बाद सुर्खियों में आए इस मामले में पुलिसिया अनुसंधान की दिशा और कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में दिख रही है।

पीड़िता के पिता के बयान पर दर्ज जमुई थाना कांड संख्या 428/2026 की प्राथमिकी में उस नाबालिग छात्र के परिवार, पिता का नाम और उसके निवास का कोई उल्लेख नहीं किया गया है, जो स्कूटी से छात्रा के साथ मड़वा गया था और जिसे आरोपितों ने बेरहमी से पीटा था।

घटना के कई दिन बीतने के बावजूद पुलिस ने उस पीड़ित छात्र का आधिकारिक बयान तक दर्ज नहीं किया है, जबकि वह मामले का अहम चश्मदीद है।

मुख्य आरोपित की पेशी पर सवाल

इसके अलावा, कथित पुलिस मुठभेड़ में पैर में गोली लगने से घायल हुए मुख्य आरोपित नंदन यादव को अब तक पॉक्सो की विशेष अदालत में न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए औपचारिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी तैर रहे हैं कि बालू और अन्य अवैध धंधों से जुड़े रहने के कारण आरोपितों का स्थानीय पुलिस तंत्र में पूर्व से संपर्क रहा है, जिससे पारदर्शी अनुसंधान प्रभावित होने का अंदेशा जताया जा रहा है।

महिसौड़ी बाबू टोला के लोग मानसिक तनाव में

मड़वा पहाड़ पर मनचलों द्वारा बदसलूकी के दौरान जब छात्र से उसका नाम-पता पूछा गया था, तो उसने खौफ के कारण अपना पता 'महिसौड़ी बाबू टोला' बता दिया था।

वीडियो वायरल होते ही देश-विदेश में यह संदेश फैल गया कि दोनों बच्चे महिसौड़ी बाबू टोला के रहने वाले हैं। इसके बाद से उस मोहल्ले के लोग भारी मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। बाहर रह रहे नाते-रिश्तेदार लगातार फोन कर परिवारों से जानकारी मांग रहे हैं।

पार्षद प्रतिनिधि ने दी सफाई

महिसौड़ी बाबू टोला वार्ड संख्या 12 के वार्ड पार्षद प्रतिनिधि कुणाल सिंह ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में दिखने वाले दोनों नाबालिग बच्चों का महिसौड़ी बाबू टोला से कोई संबंध नहीं है और वे यहां के किसी परिवार के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

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