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न मां की गोद मिली, न पिता का सहारा... सिस्टम की लापरवाही ने छीनी आस्था की जिंदगी, उजड़ गया मासूमों का संसार

Published: Sun, 04 Oct 2026 08:04 PM (IST)

दस माह पहले पति को सड़क हादसे में खोने वाली आस्था की प्रसव के बाद कथित चिकित्सकीय लापरवाही से मौत हो गई।

अस्पताल की लापरवाही से गई आस्था की जान। (जागरण)

अस्पताल की लापरवाही से गई आस्था की जान। (जागरण)

HighLights

  1. पति की मौत के दस माह बाद आस्था की मृत्यु।

  2. प्रसव के बाद कथित चिकित्सकीय लापरवाही से मौत हुई।

  3. चार साल की बेटी और नवजात बेटा अनाथ हुए।

मणिकांत, जमुई। दस माह पहले सड़क हादसे में पति रतन सिंह को खो चुकी आस्था ने शायद ही सोचा होगा कि जिंदगी उसे एक और ऐसा जख्म देगी, जिससे उसके मासूम बच्चों का पूरा संसार ही उजड़ जाएगा।

पति की मौत के बाद उसके बच्चों के लिए वह अकेली ही सहारा थी। लेकिन, अब व्यवस्था की लापरवाही के बीच आस्था ने भी दम तोड़ दिया।

उसकी मौत के साथ ही महज चार साल की बच्ची आरुही और एक नवजात के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया। पति की मौत के बाद आस्था ने किसी तरह खुद को संभाला था।

पति के जाने का दर्द सीने में दबाकर वह चार साल की बच्ची की परवरिश में जुटी थी। परिवार को उम्मीद थी कि वक्त के साथ जख्म भरेंगे और आरुही की जिंदगी पटरी पर लौटेगी।

न ममता बची न पिता का साया

लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अब घर में न मां की ममता बची है और न पिता का साया। स्वजनों के अनुसार, आस्था को प्रसव पीड़ा के बाद शनिवार को सदर अस्पताल ले जाया गया।

शाम में उसने पुत्र को जन्म दिया। देर रात तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज की जरूरत थी। स्वजन का आरोप है कि समय पर चिकित्सकीय मदद और व्यवस्था नहीं मिलने के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंतत: उसने दम तोड़ दिया।

आस्था की मौत ने अस्पताल और स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे मार्मिक तस्वीर उन मासूम बच्चों की है, जिन्हें अभी मां की गोद और पिता के सहारे की सबसे अधिक जरूरत थी।

तीन साल की बच्ची शायद यह भी नहीं समझ पा रहा कि उसकी मां अब कभी लौटकर नहीं आएगी। वहीं, नवजात को तो मां की ममता का अर्थ समझने की उम्र भी नहीं मिली।

10 महीने के भीतर 2 मौत

एक ही परिवार में महज दस माह के भीतर दो मौतों ने खुशियों को मातम में बदल दिया है। पति रतन सिंह की मौत का गम अभी परिवार भूल भी नहीं पाया था कि आस्था की मौत ने दूसरा बड़ा आघात दे दिया।

अब सवाल सिर्फ एक परिवार के उजड़ने का नहीं, बल्कि उन व्यवस्थागत खामियों का भी है, जिनके कारण समय पर इलाज और जरूरी चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल पाने के आरोप सामने आए हैं। स्वजनों को अब न्याय और बच्चों के भविष्य के लिए सहारे की उम्मीद है।