विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

खैरा गढ़ बनाम गिद्धौर रियासत! जमुई में दो अलग-अलग दिन मनेगी महानवमी, 19 और 20 को बलि; सदियों पुरानी है परंपरा

Published: Sat, 17 Oct 2026 12:17 PM (IST)

Durga Puja 2026: जमुई में शारदीय नवरात्र के दौरान महानवमी के बलि अनुष्ठान की तिथियों को लेकर बना संशय अब ...और पढ़ें

Durga Puja 2026: खैरा गढ़ बनाम गिद्धौर रियासत!

Durga Puja 2026: खैरा गढ़ बनाम गिद्धौर रियासत!

जागरण संवाददाता, जमुई। Durga Puja 2026: शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर जिले में महानवमी के बलि अनुष्ठान और विजयादशमी की तिथियों को लेकर बना संशय अब स्पष्ट हो गया है। उत्तर भारत के बनारसी पंचांग और मिथिला के कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय पंचांग के गणितीय मान में अंतर के चलते जिले के दो प्रमुख अंचलों में अलग-अलग दिन पूजा व बलि अनुष्ठान संपन्न होंगे। जहां खैरा गढ़ और सोनो में 19 अक्टूबर (सोमवार) को महानवमी का बलि अनुष्ठान होगा, वहीं ऐतिहासिक गिद्धौर रियासत और झाझा में यह 20 अक्टूबर (मंगलवार) को संपन्न किया जाएगा।

खैरा गढ़ बनाम गिद्धौर रियासत

एक ही जिले में दो अलग-अलग दिन बलि अनुष्ठान होने के पीछे यहां की सदियों पुरानी रियासती पृष्ठभूमि और पारंपरिक व्यवस्था मुख्य आधार है। जमुई जिले में खैरा गढ़ और गिद्धौर दोनों ही अत्यंत प्राचीन और प्रतिष्ठित रियासतें रही हैं। दोनों ही राजघरानों के अपने-अपने कुल पुरोहित, स्वतंत्र धार्मिक आचार्य और अलग काल-गणना परंपराएं हैं।

खैरा गढ़ बनाम गिद्धौर रियासत: पूजा परंपरा एक नजर में

  • खैरा गढ़ रियासत (एवं सोनो क्षेत्र):

    • मान्य पंचांग: बनारसी पंचांग पद्धति।

    • बलि अनुष्ठान तिथि: 19 अक्टूबर (सोमवार) — अपराह्न काल में कर्मव्यापिनी नवमी के प्रवेश पर।

  • गिद्धौर रियासत (एवं झाझा क्षेत्र):

    • मान्य पंचांग: मिथिला पंचांग (कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय)।

    • बलि अनुष्ठान तिथि: 20 अक्टूबर (मंगलवार) — सूर्योदयकालीन उदयातिथि के आधार पर।

    • विजयादशमी (दशहरा): 21 अक्टूबर (बुधवार)।

  • ऐतिहासिक संदर्भ: दोनों रियासतों के स्वतंत्र कुल पुरोहित और अपनी-अपनी सदियों पुरानी काल-गणना परंपरा।

अपनी-अपनी परंपरा और कुल पुरोहित

ऐतिहासिक रूप से गिद्धौर रियासत के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में मिथिला पंचांग (दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय) की व्यवस्था का अक्षरशः पालन होता आया है। दूसरी ओर, खैरा रियासत में आदिकाल से बनारसी पद्धति के अनुसार धार्मिक तिथियां और अनुष्ठान तय किए जाते रहे हैं। धार्मिक जानकारों का कहना है कि दोनों रियासतों की अपनी स्वतंत्र मान्यताएं हैं, इसलिए एक ही जिले में दो अलग-अलग दिन महानवमी की बलि होना पूरी तरह स्वाभाविक और पारंपरिक है।

बनारसी बनाम मिथिला गणना

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष तिथियों के घटी-पल और संधिपूजा को लेकर दोनों पंचांगों की शास्त्रीय व्याख्या में अंतर है। दुर्गा पूजा में बलिदान और महानवमी का पूजन मुख्य रूप से 'कर्मव्यापिनी तिथि' (दोपहर या अपराह्न काल में नवमी की उपस्थिति) अथवा संधिपूजा के आधार पर तय होता है।

क्या है शास्त्रीय गणित?

बनारसी पंचांग की गणना के अनुसार, 19 अक्टूबर (सोमवार) को दिन में ही अष्टमी समाप्त होकर नवमी तिथि का प्रवेश हो रहा है। चूंकि दोपहर के बाद नवमी व्याप्त हो रही है, इसलिए बनारसी पद्धति को आधार मानने वाले खैरा गढ़ और सोनो दुर्गा मंदिर में सोमवार को ही बलि और नवमी का अनुष्ठान शास्त्रसम्मत माना गया है।

इसके विपरीत, मिथिला पंचांग की व्यवस्था में 'उदयातिथि' (सूर्योदय के समय विद्यमान तिथि) को ही सर्वोपरि मान्यता दी जाती है। इस गणना के अनुसार नवमी का मुख्य उदया मान 20 अक्टूबर (मंगलवार) के सूर्योदय काल में प्राप्त हो रहा है। इसी कारण गिद्धौर रियासत और झाझा के शक्तिपीठों में 20 अक्टूबर को महानवमी की बलि दी जाएगी, जबकि 21 अक्टूबर (बुधवार) को उदयाकालीन दशमी तिथि में माता की विदाई और विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।

18 की रात निशा बलि

सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति गोला चकाई में नवरात्र पूजन की तिथियां तय कर ली गई हैं। मंदिर के पुजारी अनिल मिश्रा और लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि 18 अक्टूबर की रात 11 बजे विधिवत निशा पूजा संपन्न होने के उपरांत निशा बलि का अनुष्ठान प्रारंभ होगा। इसके पश्चात 19 अक्टूबर को महानवमी की पूजा-अर्चना होगी तथा 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) का महापर्व श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

यह भी पढ़ें- भागलपुर के स्कूल यूनिफॉर्म में महिषासुरमर्दिनी; कट‍िहार में बच्चों ने त्रिशूल से किया नशे का अंत, गूंजे प्रेरक नारे