फ्रांस तक पहुंची जमुई की 'जंगल की बेटी' की गूंज, पुष्पा खैरवार से मिलने जतहर गांव पहुंचीं विदेशी शोधकर्ता
फ्रांस से आई शोधकर्ता रेमानी ने जमुई के जतहर गांव में 'जंगल की बेटी' पुष्पा खैरवार से मुलाकात की। पुष्पा ...और पढ़ें

पुष्पा खैरवार से मिलने जतहर गांव पहुंचीं विदेशी शोधकर्ता
HighLights
फ्रांस की रेमानी ने जमुई की पुष्पा खैरवार से मुलाकात की।
पुष्पा 'जंगल की बेटी' के नाम से जानी जाती हैं।
उन्होंने जैव विविधता और पारंपरिक जड़ी-बूटियों का संरक्षण किया।
संवाद सहयोगी, जमुई। जल-जंगल-जमीन और जैव विविधता के संरक्षण की मुहिम अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है। इसी क्रम में फ्रांस से पहुंचीं रेमानी ने खैरा प्रखंड अंतर्गत हरणी पंचायत के जतहर गांव में ‘जंगल की बेटी’ के नाम से पहचान बनाने वाली पुष्पा खैरवार से मुलाकात की।
पुष्पा लंबे समय से विलुप्त हो रहे पेड़-पौधों और पारंपरिक जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए काम कर रही हैं।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा
रिजेनरेटिव संस्था बिहार की ओर से क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न स्तरों पर पहल की जा रही है। इसी पहल के तहत संस्था की टीम जतहर गांव पहुंची और पुष्पा खैरवार के संरक्षण कार्यों की जानकारी ली।
फ्रांस की रेमानी ने पुष्पा से बातचीत कर स्थानीय जैव विविधता, पारंपरिक वनस्पतियों और उनसे जुड़े ज्ञान को संरक्षित करने के प्रयासों को समझा। बातचीत के दौरान जल-जंगल-जमीन के संरक्षण के साथ जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा हुई।
खेती-किसानी पर बदलते मौसम के असर और पारंपरिक ज्ञान को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत पर विचार-विमर्श किया गया। स्थानीय स्तर पर पेड़-पौधों और जड़ी-बूटियों की उपलब्धता तथा उनके संरक्षण के प्रयासों को भी साझा किया गया।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं शोधकर्ता प्रदीप कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं शोधकर्ता इस्तियाक अहमद तथा सिलिश पटना से जुड़े अन्य लोग मौजूद रहे। टीम ने स्थानीय समुदाय के पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को समझने के साथ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर भी चर्चा की।
