फोटो 22 जमुई 1

संवाद सूत्र, खैरा (जमुई):

कोरोना की पहली लहर के बाद से ही मूर्तिकार के जीवन में उथल-पुथल मची है। कई मूर्तिकारों की कमाई पर अंकुश लग गया है। लाकडाउन के बाद जितने भी पर्व त्योहार आए भीड़-भाड़ पर रोक रहने, सादगी के साथ मनाए जाने व अल्प मांग होने के कारण बेहद कम मूर्तियां बनाई जाती रही थी। वह भी अधिकांश मूर्तियां चार से पांच फीट आकार की ही बनाई जा रही थी। मूर्तिकार बताते हैं कि पिछले दो सालों में कोरोना के कारण उन्हें बेहद कम कमाई हुई है। सरस्वती पूजा को देखते यूं तो वे मूर्तियां बना रहे हैं, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के बीच उनकी बिक्री कहां तक होगी कुछ नहीं कहा जा सकता है।

-------

मूर्तिकारों के चेहरे पर छाई मायूसी

कई मूर्तिकार हैं, जो साल भर सिर्फ मूर्ति बनाने का काम करते हैं, लेकिन कोरोना की तीसरी लहर में उनके चेहरे पर मायूसी छाई है। खैरा बाजार के मूर्तिकार दिलीप लहेरी, अशोक पंडित व मुन्ना पंडित ने बताया कि वे लोग करीब 10 सालों से मूर्ति बना रहे हैं। सरस्वती पूजा के लिए मूर्ति बुकिग के अनुसार तीन माह पूर्व से ही बनानी शुरू हो जाती थी।

-------

मूर्ति तो बन रही है, खरीदार नहीं पहुंच रहे

लाकडाउन के बाद से ही सभी सामान की दर में वृद्धि हुई है। अभी जितनी मूर्ति बनाए जा रही है, उस हिसाब से बिक्री भी नहीं हो रही है। बताया जाता है कि बड़ी मूर्तियों के खरीदार कम हैं, अधिकतर लोग छोटी मूर्तियां खरीद रहे हैं और सादगी तरीके से पूजा का आयोजन कर रहे हैं। मूर्तिकारों की मानें तो अगर बनी मूर्ति बिक जाए तो पूंजी लौटने के साथ कुछ मुनाफा हो सकेगा।

Edited By: Jagran