बिहार में आरक्षण पर घमासान: MLA प्रफुल्ल का अरुण भारती पर सीधा वार, चिराग के परिवार पर भी लगाए आरोप
जमुई में आरक्षण की समीक्षा और उपवर्गीकरण के मुद्दे पर एनडीए घटक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ...और पढ़ें
HighLights
आरक्षण समीक्षा, उपवर्गीकरण मुद्दे पर एनडीए दलों में तेज हुई बयानबाजी।
हम विधायक प्रफुल्ल मांझी ने सांसद अरुण भारती पर तीखा हमला बोला।
प्रफुल्ल मांझी ने जीतन राम मांझी के आरक्षण संबंधी बयान का समर्थन किया।
संवाद सहयोगी, जमुई। आरक्षण की समीक्षा और उपवर्गीकरण के मुद्दे पर एनडीए घटक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। जमुई सांसद अरुण भारती द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री व हम के संरक्षक जीतन राम मांझी पर की गई टिप्पणी के बाद अब सिकंदरा से हम के विधायक प्रफुल्ल मांझी ने मोर्चा खोल दिया है।
सोमवार को जमुई सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता में विधायक ने सांसद अरुण भारती और लोजपा (रामविलास) नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने कई व्यक्तिगत आरोप और सवाल भी उठाए।
प्रफुल्ल मांझी ने जीतन राम मांझी के आरक्षण संबंधी बयान का समर्थन करते हुए कहा कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार आरक्षण की समीक्षा के साथ उपवर्गीकरण पर भी विचार करे, ताकि सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक पिछड़े तथा अब तक आरक्षण के लाभ से वंचित समुदायों को उचित अवसर मिल सके।
विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक परिवारों ने आरक्षण और राजनीतिक अवसरों का लाभ अपने परिवार तक सीमित रखा।
उन्होंने दिवंगत रामविलास पासवान को दलितों का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि वर्ष 2005 तक वे उनका समर्थन करते रहे, लेकिन बाद की राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उनका नजरिया बदल गया।
प्रफुल्ल मांझी ने आरोप लगाया कि जीतन राम मांझी ने अपने राजनीतिक जीवन में भुइयां और मुसहर समेत वंचित समुदायों के लिए काम किया। उन्होंने टोला सेवकों के मुद्दे को भी उठाते हुए कहा कि इन कर्मियों के वेतन भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होना चाहिए।
विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की कानूनी कार्रवाई के कारण टोला सेवकों के सामने परेशानी उत्पन्न हुई है।
प्रेसवार्ता के दौरान विधायक ने सांसद अरुण भारती को राजनीतिक रूप से अनुभवहीन बताते हुए उनके परिवार को लेकर भी कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।
साथ ही उन्होंने जीतन राम मांझी के परिवार और सार्वजनिक जीवन को पारदर्शी बताते हुए कहा कि उनके नेता ने हमेशा समाज के वंचित तबकों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। विधायक के बयान के बाद जमुई की राजनीति में आरक्षण और उपवर्गीकरण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
