बिहार में जेल से छूटते ही 'रील' से भौकाल टाइट! महंगी गाड़ियां और घटिया डायलॉग पर बना रहे वीडियो
Bihar Criminals Viral Reels: जमानत पर छूटे अपराधी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर दबंग अंदाज वाली रीलें बना रहे हैं, जिनमें ...और पढ़ें

Bihar Criminals Viral Reels: जेल से जमानत पर छूटते ही इंटरनेट मीडिया पर भौकाल दिखा रहे बदमाश।
HighLights
जमानत पर छूटे अपराधी सोशल मीडिया पर बना रहे दबंग रीलें।
रीलों में महंगी गाड़ियां, आपत्तिजनक संवाद और अपराध का महिमामंडन।
जमुई पुलिस साइबर सेल की मदद से कर रही संदिग्ध प्रोफाइलों की निगरानी।
संवाद सहयोगी, जमुई। Bihar Criminals Viral Reels: गंभीर आपराधिक वारदातों के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे पहुंचने के बाद अदालत से जमानत पाकर बाहर आए कुछ बदमाश अब इंटरनेट मीडिया को अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर इन दिनों उनकी दबंग अंदाज वाली रीलें खूब प्रसारित हो रही हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें कई ऐसे चेहरे शामिल हैं, जिनके खिलाफ जमुई जिले के विभिन्न थानों में हत्या, लूट और अपहरण जैसे संगीन मामलों में गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज रही है। कानून की गिरफ्त से जमानत पर बाहर आकर इस तरह अपना कथित भौकाल दिखाने की प्रवृत्ति समाज और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए नई चुनौती खड़ी कर रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन रीलों में ये युवक कभी महंगी लग्जरी गाड़ियों के साथ, तो कभी दर्जनों समर्थकों की भीड़ के बीच शक्ति प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। कई वीडियो में आपत्तिजनक संवादों (डायलॉग्स) के साथ-साथ जेल, गोली-बारूद और अपराधियों को महिमामंडित करने वाले गीतों को बैकग्राउंड साउंड के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। एल्गोरिदम के चलते ये वीडियो तेजी से प्रसारित होकर लाखों व्यूज हासिल कर रहे हैं, जिसका किशोरों और स्थानीय युवाओं की मानसिकता पर बेहद नकारात्मक असर पड़ रहा है।
कई थानों में दर्ज हैं संगीन मामले, निगरानी जरूरी
जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हत्या के प्रयास, लूट और फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में नामजद रहे आरोपितों के एकाउंट्स पर ऐसी गतिविधियों की तादाद लगातार बढ़ रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी व्यक्ति का केवल सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करना सीधे तौर पर अपराध साबित नहीं करता, लेकिन आपराधिक पृष्ठभूमि और जमानत की शर्तों के मद्देनजर ऐसी गतिविधियों की सत्यता जांचना और नजर रखना बेहद अहम हो जाता है।
इंटरनेट मीडिया पर बेल पर छूटे बदमाशों का ट्रेंड
प्लेटफॉर्म: इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब शॉर्ट्स।
सामग्री का स्वरूप: लग्जरी गाड़ियों के काफिले, हथियार-प्रेरित बैकग्राउंड म्यूजिक, दबंग डायलॉग और समर्थकों की भीड़।
चिंता का विषय: जमानत पर छूटने के बाद समाज में भय या दबदबा कायम करने का प्रयास।
प्रशासनिक कदम: साइबर सेल द्वारा संदिग्ध प्रोफाइलों की ट्रैकिंग और जमानत की शर्तों के उल्लंघन की विधिक जांच।
जमानत पर रहते हुए यदि कोई व्यक्ति समाज में भय पैदा करने या कानून को चुनौती देने का आभासी प्रयास करता है, तो यह बेल कैंसिलेशन (जमानत रद्द) का आधार भी बन सकता है।
साइबर सेल की मदद से नजर रख रही जमुई पुलिस
आपराधिक प्रवृत्ति के युवकों द्वारा सोशल मीडिया के इस खुले दुरुपयोग को लेकर पुलिस महकमा भी सतर्क नजर आ रहा है। जिला पुलिस प्रशासन साइबर सेल की तकनीकी सहायता से ऐसे संदिग्ध हैंडल्स और प्रोफाइल की पहचान करने में जुट गया है।
अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि शांति व सौहार्द बिगाड़ने या बदमाशों को हीरो के रूप में पेश करने वाली किसी भी आपत्तिजनक गतिविधि को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और कानून का उल्लंघन पाए जाने पर ऐसे तत्वों के विरुद्ध ठोस विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
