जहानाबाद

कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप अब थम चुका है। लोग निश्चिंत होकर घर से निकल रहे हैं। सफर करना भी अब पहले से ज्यादा लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लेकिन इस दौरान जो लापरवाही हो रही है वह ठीक नहीं है। जैसे ही संक्रमण की रफ्तार कम हुई हर कोई लापरवाह नजर आने लगे हैं । कर्मी से लेकर यात्री तक इसे लेकर उदासीन रवैया अपना रहे हैं। रविवार को जहानाबाद स्टेशन का अवलोकन करने के दौरान जो स्थिति सामने नजर आया उससे यहीं कहा जा सकता है कि लापरवाही हर ओर बढ़ गई है। समय 12.00 बजे

गया-पटना मेमू सवारी गाड़ी कुछ ही मिनटों बाद आने वाली थी। जिसके कारण गंतव्य तक का टिकट लेना भी जरूरी था। परिणामस्वरूप टिकट काउंटर पर लंबी कतारें लगी हुई थी। लेकिन कतार में एक दूसरे के बीच लेश मात्र की भी दूरी नहीं थी। लोग टिकट लेने की हड़बड़ी में एक दूसरे से और चिपकते जा रहे थे। रिजर्वेशन काउंटर पर सबसे अधिक भीड़ थी। इस हालात में दो गज की दूरी का अनुपालन संभव नहीं था। यहां कोई कर्मी भी नहीं था जो लोगों को दो गज की दूरी का अनुपालन करवाता। स्थिति कोरोना गाइडलाइन को लेकर कहीं से भी बेहतर नजर नहीं आ रहा था। लापरवाही के इस आलम के बीच संक्रमण की चेन बनने की पूरी संभावना थी। समय 12:30 बजे

प्लेटफार्म से लेकर रेलवे परिसर तक लोगों की चहल कदमी थी। लोग मास्क का उपयोग भी कर रखे थे। लेकिन कई लोगों का मास्क नाक नीचे लटक रहा था। स्थिति आम दिनों की तरह ही थी। कहीं भी कोरोना गाइडलाइन को लेकर कुछ अलग नहीं देखा रहा था। समय 1:00 बजे

संक्रमण गाइडलाइन के तहत कोरोना जांच शिविर तो जरूर लगे थे। लेकिन वहां कोई हलचल नहीं था।

कर्मी आराम फरमा रहे थे तो आने जाने वाले यात्री जांच करवाना जरूरी नहीं समझ रहे थे। स्थिति को देखकर ऐसा लग रहा था कि अब स्टेशन पर कोरोना जांच शिविर महज खानापूर्ति तक हीं सीमित है। हालांकि दूसरी लहर के दौरान यहां जांच के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती थी। फिलहाल इसकी जरूरत ना तो यात्री समझ रहे थे और न हीं इसे लेकर कर्मी ही सक्रिय थे।

Edited By: Jagran