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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 28, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है लक्ष्मी नारायण मंदिर

By JagranEdited By:
Published: Fri, 28 May 2021 05:30 PM (IST)

सनातन धर्म के वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए लक्ष्मी नारायण मंदिर वर्षो से आस्था का केंद्र बना हुआ है।

वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है लक्ष्मी नारायण मंदिर
वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है लक्ष्मी नारायण मंदिर

संवाद सहयोगी, हुलासंगज, जहानाबाद: सनातन धर्म के वैष्णव संप्रदाय के लोगों के लिए लक्ष्मी नारायण मंदिर वर्षो से आस्था का केंद्र रहा है। प्रखंड मुख्यालय स्थित सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ²ष्टिकोण से महत्वपूर्ण लक्ष्मी-नारायण मंदिर में छह आलय हैं। दूसरे प्रदेश में भी इस मंदिर की ख्याति है। मंदिर परिसर में अवस्थित राष्ट्रीय संस्कृत माहाविद्यालय उच्च शिक्षा का अलख जगा रहा है। इस महाविद्यालय से आचार्य की डिग्री पाकर कई लोग विभिन्न इलाकों में अपनी प्रतिभा का डंका बजा रहे हैं। 1979 में वीरान स्थल में किया गया था मंदिर का निर्माण

वैष्णव सम्प्रदाय के लोगों के लिए आस्था और धार्मिक ²ष्टिकोण से अद्वितीय माने जाने वाले लक्ष्मी-नारायण मंदिर और मुख्य प्रवेश द्वार गोपुरम वास्तुशिल्प का अभूतपूर्व नमूना पेश कर रहा यह है। 11 एकड़ में स्थापित सम्पूर्ण परिसर को अस्तित्व में लाने का मुख्य श्रेय सरौती मठ के मठाधीश स्वामी प्राणकुषाचार्य जी महाराज एवं वर्तमान के मठाधीश स्वामी रंगरामानुजाचार्य जी महाराज को जाता है। 1979 में इस वीरान स्थल में मंदिर की स्थापना कर इस क्षेत्र को एक नया स्वरूप स्वामी जी ने प्रदान किया था। कालांतर में झलासगंज हुआ करता था इस क्षेत्र का नाम

मान्यता के अनुसार इस इलाके में झार के जंगलों की भरमार थी। इस कारण हीं इस क्षेत्र का कालांतर में नाम भी झलासगंज हुआ करता था। मंदिर परिसर की स्थापना दक्षिण भारत के तिरुपति बालाजी के तर्ज पर किया गया था। मंदिर परिसर का मुख्य प्रवेश द्वार यानी गोपुरम, गीता भवन जो प्रवचन और व्याख्यान कक्ष के रूप में जाना जाता है, इसके अलावा वैष्णव अतिथि कक्ष, यज्ञशाला भवन इत्यादि कई भवन उत्कृष्ठ रूप से मंदिर परिसर में अलग-अलग विद्यमान हैं ।

छह आलय का यहां विशेष महत्व, प्रकाशित होतीं 22 पुस्तकें

लक्ष्मी-नारायण मंदिर और गीता भवन को देवालय कहा जाता है। लक्ष्मी-नारायण मंदिर की वास्तुशिल्प स्थापत्यकला का अद्भुत नमूना है। मुद्रणालय- संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियों को संरक्षित करने सहित अध्यात्म और वैदिक व्यवस्था को बनाये रखने में यहां के मुद्रणालय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यहां से 22 पुस्तकें प्रकाशित होती है। जिसमें श्राद्ध चन्द्रिका, विवाह चन्द्रिका, वास्तु चन्द्र प्रकाश, गीता रहस्य चन्द्रिका, त्रैमासिक वैदिक वाणी महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय है। जिसमें श्रीमद्भगवदगीता के रहस्यों पर स्वामीजी द्वारा लिखी टिका गीता तथा रहस्य चन्द्रिका काफी महत्वपूर्ण ग्रंथ मानी जाती है। औषधालय में आयुर्वेद के रिसर्च के साथ-साथ लोगों का आयुर्वेदिक पद्धति से नि:शुल्क इलाज किया जाता है। इसके लिए परिसर में जड़ी-बूटियों को उगाने के लिए औषधि वाटिका की भी व्यवस्था है। प्रथम से लेकर मध्यमा स्तर तक निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था

राज्य सरकार और संस्कृत शिक्षण संस्थान के सहयोग से प्रथम से लेकर मध्यमा स्तर तक नि:शुल्क शिक्षण की व्यवस्था यहां की गयी है। राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षण संस्थान और सम्पुर्नानन्द काशी विश्वविद्यालय से संबद्ध राष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्ठ संस्कृत शिक्षण संस्थान है। जिसमें ज्योतिष, कर्मकांड दर्शन के साथ-साथ कई विषयों की पढ़ाई के साथ-साथ उपशास्त्री से लेकर आचार्य तक की पढ़ाई की व्यवस्था है। इस शिक्षण संस्थान में इस्लाम धर्म को मानने वाले कई छात्र संस्कृत का अध्ययन कर रहे हैं। पांच हजार से अधिक किताबें हैं यहां के पुस्तकालय में

पुस्तकालय में पांच हजार से अधिक पुस्तक उपलब्ध है, जिसका अध्ययन यहां के अध्ययनरत छात्रों के अलावा धर्माणुरागी भी करते हैं। इसके अलावा यहां नि:शुल्क आवासीय व्यवस्था छात्रों के लिए उपलब्ध है। जिसमें भोजन,वस्त्र के अतिरिक्त आवश्यक पाठ्यपुस्तक और स्टेशनरी भी सम्मिलित है। गोशाला में बीमार और दूधारू दोनों प्रकार की गायें हैं मौजूद

यहां की गोशाला में बीमार और दुधारू दोनों किस्म की गायें हैं। सेवा आश्रम के लोग किया करते हैं। गरीब और निर्धन बच्चों के लिए समुचित व्यवस्था मंदिर ट्रस्ट से की जाती है। आस्था और आध्यात्मिक ²ष्टिकोण के अलावा सनातन धर्म और आश्रम व्यवस्था और गुरुकुल की प्राचीन परम्परा आज भी भारतीय परम्परा और संस्कृति को जीवंत करने में सराहनीय भूमिका का निर्वहन यह संस्थान कर रहा है।