जहानाबाद के आंगनबाड़ी केंद्र में आयरन सिरप पीने के बाद बच्चों को उल्टी, डॉक्टरों की टीम ने बताई वजह
जहानाबाद के कखौरा आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों को आयरन सिरप पीने के बाद उल्टी की शिकायत हुई, जिसके बाद जिला ...और पढ़ें

सिरप पीने के बाद भीड़। फोटो जागरण
HighLights
आयरन सिरप पीने के बाद बच्चों को उल्टी हुई।
जिला प्रशासन की जांच में सभी बच्चे स्वस्थ पाए गए।
अभिभावकों को सामान्य प्रतिक्रिया पर जागरूक रहने की सलाह।
जागरण संवाददाता, जहानाबाद। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत बच्चों और किशोर-किशोरियों को आयरन की खुराक देने के दौरान रतनी फरीदपुर प्रखंड के कखौरा आंगनबाड़ी केंद्र पर कुछ बच्चों को उल्टी की शिकायत हुई।
सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और अधिकारियों और चिकित्सकों की टीम ने केंद्र पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की। जांच के दौरान सभी बच्चे स्वस्थ पाए गए।
जिलाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया के निर्देश पर अपर समाहर्ता विशेष कार्यक्रम तेज नारायण राय, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आईसीडीएस तथा संबंधित चिकित्सा पदाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
चिकित्सक डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि आयरन सिरप लेने के बाद कुछ बच्चों में कभी-कभी उल्टी जैसी सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है। खाली पेट सिरप लेने या उसकी गंध और स्वाद के कारण भी ऐसी परेशानी हो सकती है, जो सामान्य रूप से चिंताजनक नहीं होती।
अधिकारियों ने अभिभावकों को बताया कि सीमित बार उल्टी होने पर बच्चे को ओआरएस का घोल देकर निगरानी रखी जा सकती है। बार-बार उल्टी होने या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में आयरन की कमी एवं एनीमिया की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उपलब्ध कराए जा रहे आयरन सिरप/टैबलेट का सेवन बच्चों को अवश्य कराएं।
सामान्य प्रतिक्रिया की स्थिति में घबराने के बजाय बच्चे की निगरानी करें तथा आवश्यकता पड़ने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर सेविका एवं संबंधित आशा कार्यकर्ता आपसी समन्वय से बच्चों के अभिभावकों को आयरन सिरप/टैबलेट के सही सेवन, निर्धारित मात्रा तथा सेवन के बाद कभी-कभी होने वाली उल्टी, चक्कर अथवा अन्य सामान्य प्रतिक्रियाओं के संबंध में पूर्व से जागरूक करें। साथ ही दवा के सेवन के उपरांत बच्चों की नियमित निगरानी एवं आवश्यक देखभाल सुनिश्चित की जाए।
