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गया-पटना ही नहीं, झारखंड से गंगा संगम तक बदलेगी फल्गु की तस्वीर; गाद हटेगी और बनेगा 300 KM का नदी कॉरिडोर

Published: Mon, 24 Aug 2026 09:20 AM (IST)

फल्गु (निरंजना) नदी को झारखंड से गंगा संगम तक पुनर्जीवित करने की पहल तेज हो गई है, जिसमें 300 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।

फल्‍गु नदी का होगा कायाकल्‍प। फाइल

फल्‍गु नदी का होगा कायाकल्‍प। फाइल

HighLights

  1. फल्गु नदी पुनर्जीवन की पहल तेज, 300 KM कॉरिडोर बनेगा।

  2. केंद्रीय मंत्रियों की बैठक में अंतरराज्यीय बाधाएं दूर करने पर सहमति।

  3. NHAI करेगा डीसिल्टिंग, मिट्टी का उपयोग राजमार्ग निर्माण में।

जागरण संवाददाता, जहानाबाद। जहानाबाद से होकर गुजरने वाली फल्गु (निरंजना) नदी को फिर से अविरल और बारहमासी बनाने की पहल तेज हो गई है।

नदी के उद्गम स्थल झारखंड के चतरा/बेलगड्डा से लेकर बिहार के गया और जहानाबाद होते हुए गंगा संगम तक नदी को पुनर्जीवित करने की तैयारी है।

इस संबंध में 20 अगस्त को नई दिल्ली स्थित परिवहन भवन में केंद्र सरकार के चार प्रमुख मंत्रालयों के मंत्रियों की बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की।

बैठक में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और नमामि निरंजना अभियान के संस्थापक संजय सज्जन सिंह मौजूद रहे।

बिहार-झारखंड की अनुमति के बाद शुरू होगा काम

संजय सज्जन सिंह के अनुसार, बैठक में फल्गु नदी के पुनर्जीवन में आ रही अंतरराज्यीय अड़चनों को दूर करने पर सहमति बनी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि बिहार और झारखंड सरकार से अनुमति एवं अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) मिलने के बाद एनएचएआइ नदी पुनर्जीवन के पहले चरण का काम अपने हाथ में लेगा।

नदी के जिन हिस्सों में लंबे समय से गाद जमा होने के कारण उसका अस्तित्व प्रभावित हुआ है, वहां डीसिल्टिंग और मिट्टी की खुदाई कराई जाएगी।

निकाली गई मिट्टी का उपयोग राजमार्ग निर्माण में किया जा सकेगा। इससे हाईवे निर्माण में सामग्री की उपलब्धता सुगम होने के साथ नदी के पुराने प्राकृतिक बहाव मार्ग को भी गंगा संगम तक दोबारा खोलने में मदद मिलेगी।

करीब 300 किलोमीटर लंबे नदी कॉरिडोर के विकास पर जोर

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने करीब 300 किलोमीटर लंबे पूरे नदी कॉरिडोर के समग्र विकास पर जोर दिया। उन्होंने उद्गम स्थल से गंगा संगम तक नदी के दोनों ओर परिक्रमा पथ विकसित करने की योजना पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि फल्गु नदी विश्वभर के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों और बौद्ध अनुयायियों की आस्था का केंद्र है। गया में पितरों के मोक्ष के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण करने पहुंचते हैं।

ऐसे में नदी के पुनर्जीवन के साथ इससे जुड़ी धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के विकास की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

IIT रुड़की कंसोर्टियम ने रखा वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण

बैठक में आईआईटी रुड़की कंसोर्टियम के मुख्य समन्वयक प्रो. एएस मौर्य ने फल्गु नदी के पुनर्जीवन से संबंधित विस्तृत वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण दिया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने परियोजना के तकनीकी क्रियान्वयन पर सहमति जताई।

फल्गु नदी के पुनर्जीवन की यह पहल पूरी होने पर नदी के पुराने प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के साथ इसके धार्मिक, पर्यावरणीय और पर्यटन महत्व को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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