बिहार के फल्गु-निरंजना के पुनर्जीवन को केंद्र की मंजूरी: 300 किमी नदी कॉरिडोर का होगा कायाकल्प
केंद्रीय मंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में फल्गु-निरंजना नदी को बारहमासी बनाने की परियोजना को मंजूरी मिली है। इसके तहत 300 ...और पढ़ें

एनएचएआई संभालेगा पहले चरण का काम
HighLights
केंद्रीय बैठक में फल्गु-निरंजना नदी पुनर्जीवन परियोजना को मंजूरी।
NHAI संभालेगा पहले चरण का काम, 300 किमी कॉरिडोर विकास।
चेकडैम, भूजल रिचार्ज, पौधारोपण से जल संरक्षण होगा।
संवाद सूत्र, बोधगया(गयाजी)। ऐतिहासिक फल्गु-निरंजना नदी को उसके उद्गम स्थल झारखंड के चतरा जिले के बेलगड्डा से गया होते हुए गंगा संगम तक अविरल और बारहमासी बनाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है।
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के प्रयासों से 20 अगस्त को नई दिल्ली में इस परियोजना को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने की। इसमें केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव समेत शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। बैठक में नदी के पुनर्जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
एनएचएआई संभालेगा पहले चरण का काम
नितिन गडकरी ने कहा कि बिहार और झारखंड सरकारों से आवश्यक अनुमति और एनओसी मिलने के बाद एनएचएआई नदी पुनर्जीवन परियोजना के पहले चरण का काम संभालेगा। योजना के तहत नदी के सूख चुके हिस्सों में डीसिल्टिंग और मिट्टी की खुदाई की जाएगी।
इससे नदी के प्राकृतिक बहाव मार्ग को दोबारा खोलने में मदद मिलेगी। परियोजना का उद्देश्य फल्गु-निरंजना को केवल मौसमी नदी के बजाय अविरल और बारहमासी स्वरूप देना है। इसके लिए तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाएगा।
300 किलोमीटर के नदी कॉरिडोर का होगा विकास
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने करीब 300 किलोमीटर लंबे नदी कॉरिडोर के समग्र विकास पर जोर दिया। उद्गम स्थल से लेकर संगम तक परिक्रमा पथ विकसित करने का प्रस्ताव भी परियोजना का हिस्सा होगा।
इसके साथ नदी के आसपास के क्षेत्रों को भी पर्यावरणीय और धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इससे गया और बोधगया समेत नदी से जुड़े क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
चेकडैम से भूजल रिचार्ज तक होंगे कई काम
परियोजना में केवल नदी की खुदाई और सफाई ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण से जुड़े कई कार्य भी प्रस्तावित हैं। इनमें चेकडैम का निर्माण, भूजल पुनर्भरण और आहर-पाइन के जीर्णोद्धार जैसे काम शामिल हैं।
इसके अलावा नदी के आसपास बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना भी है। इन उपायों से जल संरक्षण के साथ नदी के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
गया के लिए धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अहम परियोजना
फल्गु नदी का गया और बोधगया की धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व है। नदी के पुनर्जीवन से धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
‘नमामि निरंजना फल्गु मिशन’ के संस्थापक संजय सज्जन सिंह ने इस पहल को नदी के पुनर्जीवन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।
अब बिहार और झारखंड सरकारों की अनुमति और एनओसी के बाद परियोजना के अगले चरण की तस्वीर स्पष्ट होगी।
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