अरवल। समाहरणालय के सभाकक्ष में गुरुवार को दशहरा को लेकर डीएम रविशंकर चौधरी तथा पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन की संयुक्त अध्यक्षता में विधि व्यवस्था संधारण के लिए बैठक आयोजित की गई। डीएम ने कहा कि इस जिला में सभी त्योहार शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुए है। इस पर्व को भी विभिन्न सम्प्रदायों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है। इसके लिए पूरे जिला में 93 स्थलों पर दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति की गई। सभी को प्रतिनियुक्त स्थलों पर समय पर पहुंच जाना है तथा पूजा समिति के लोगों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करना है। सभी अपने ड्रेस में रहेंगे। किसी भी प्रकार के सूचना तुरंत निकट के थाना एवं जिला नियंत्रण कक्ष को दें।उन्होंने कहा कि अनावश्यक हरकतों पर ध्यान देना है तथा टोकते रहना है। कहीं भी आवागमन बाधित नहीं होनी चाहिए। प्रतिदिन का रिपोर्ट भी प्रस्तुत करें। डीएम ने कहा कि प्रतिनियुक्त अधिकारी व कर्मी अपने कर्तव्य एवं उत्तरदायित्वों को मुस्तैदी के साथ पालन करेंगे। सभी गाड़ी में वायरलेस ऑन करके रखना है तथा इसका श्रवण करते रहना है। सभी पूजा समिति के कम से कम पांच-पांच व्यक्ति का नाम मोबाइल नंबर के साथ पांच अक्टूबर को अपराह्न एक बजे तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया ताकि आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सके।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सभी थाना को विहित प्रपत्र उपलब्ध करा दी गई है जिसपर पूजा पंडाल की सारी गुणवता एवं गतिविधियों को निरीक्षण करते हुए प्वाइंट निर्धारित करना है। यह फॉर्म दंडाधिकारी द्वारा भरा जाएगा तथा थानाध्यक्ष द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। डीजे 10 बजे रात के बाद नहीं बजाना है। यदि बज रहा है, तो देखना है कि क्या कम आवाज में बज रहा है। डीजे के संबंध में अच्छी तरह बता देना है कि ये करना गलत है, ताकि एफआइआर दर्ज करना नहीं पड़े। मूर्ति विसर्जन के समय कोई भी हथियार लेकर भ्रमण नहीं करेगा। पूजा पंडाल के आस-पास के गतिविधियों के लिए वीडियोग्राफी करते रहना है। पूजा समिति के स्वयंसेवकों का पहचान पत्र लगे रहना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर लोग इनका सहयोग प्राप्त कर सके। विसर्जन के समय भीड़ को नियंत्रण करने के लिए समिति द्वारा माइक की व्यवस्था रखनी चाहिए। पूजा पंडाल में कॉटन कपड़ों का उपयोग होनी चाहिए ताकि आग न लग पाए। मूर्ति दर्शन के समय पुरूष एवं महिला के लिए अलग-अलग कतार रहनी चाहिए तथा सभी काम सिस्टम के तहत होते रहना चाहिए। विसर्जन के समय घाटों पर गोताखोर को रखना है ताकि आवश्यकता पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सके। विसर्जन के समय रास्ते में कहीं पानी होने पर पहले इसकी गहराई की नाप कर लेनी है तभी आगे लोगों को आगे बढ़ाना है। बैठक में सिविल सर्जन डॉ अरविद कुमार एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी शशिभूषण सिंह के साथ सभी दंडाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी उपस्थित थे।

Posted By: Jagran

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