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सब्जी मंडियों में बढ़ी अमैन के भंटे की मांग

जहानाबाद। खेती के परंपरागत तरीके से जहां किसानों को मौसमी बेरोजगारी की समस्या से जूझना पड़ता था।

By JagranEdited By: Published: Sun, 07 Apr 2019 12:48 AM (IST)Updated: Sun, 07 Apr 2019 12:48 AM (IST)
सब्जी मंडियों में बढ़ी अमैन के भंटे की मांग
सब्जी मंडियों में बढ़ी अमैन के भंटे की मांग

जहानाबाद। खेती के परंपरागत तरीके से जहां किसानों को मौसमी बेरोजगारी की समस्या से जूझना पड़ता था। वहीं इस समस्या से निजात के लिए वे लोग वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सब्जी की खेती करने में जुटे हुए हैं। सदर प्रखंड के अमैन गांव का बधार इन दिनों भंटे के पौधे से पटा हुआ है। यहां के बड़े-बड़े भंटे की चर्चा जिले के बाहर तक होती है। सब्जी बनाने की बात हो या चोखा इस भंटे का कोई जोड़ नहीं है। पहले जहां किसान धान और रबी की फसल पर ही निर्भर रहते थे। वहीं अब वे सब्जी की खेती कर अपनी आमदनी को बढ़ाने में लगे हैं। इस खेती से किसानों की माली हालत तो सुधरी ही है। उनके सामने बेरोजगारी की समस्या अब नहीं रही है। इस इलाके में बड़े पैमाने पर भंटे की खेती हो रही है। शादी-विवाह के मौसम में दूर-दूर से व्यापारी किसानों के खेतों पर पहुंच रहे हैं। वहां से ही वे लोग खरीददारी कर रहे हैं। स्थानीय सब्जी मंडी में अमैन का भंटा अपना झंडा बुलंद कर रखा है। हर कोई भंटा खरीदने से पहले दुकानदारों से यह जरूर पूछता है कि यह भंटा अमैन का ही है न। मिट्टी की खासियत कहें या फिर किसानों की मेहनत यहां के भंटे में बेहतर स्वाद रहता है। धीरे-धीरे इसकी चर्चा दूसरे जिले तक भी पहुंच गई।परिणामस्वरूप गया,अरवल और पटना जिले से भी बड़ी संख्या में व्यापारी यहां पहुंच रहे हैं। लगन में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। जिसका फायदा भी किसान उठाते हैं। उंचे दामों पर इन दिनों इसकी बिक्री हो रही है। हालांकि यहां के भंटा के पीछे कई दंत कथाएं भी प्रचलित हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां के भंटा में छिद्र अनिवार्य रूप से होता है जो एक साधु का श्राप है। हालांकि श्राप देने के उपरांत लोगों ने आरजू विनती की तो साधु का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने वरदान के रूप में कहा कि छिद्र होने के बावजूद भी इसका स्वाद लाजवाब रहेगा जिसकी चर्चा दूर-दूर तक होगी।

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किसान शारदा महतो, रणविजय महतो,इंद्र महतो,अनिल कुमार आदि लोगों ने बताया कि इसकी खेती से काफी लाभ हो रहा है। हालांकि बाजारों में दाम के उतार चढ़ाव के कारण कभी-कभी नुकसान भी सहना पड़ता है। फिर भी हमलोगों को इस खेती से बेहतर लाभ मिल रहा है।


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