बिहार की वाणावर गुफाओं को मिलेगी वैश्विक पहचान, 72 करोड़ रुपये से हो रहा काम, पर्यटन और रोजगार को लेकर बड़ी उम्मीद
जहानाबाद की वाणावर और नागार्जुनी गुफाओं को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास तेज हो ...और पढ़ें

बाणावर और नागार्जुनी गुफाएं विश्व धरोहर की सूची में होंगी शामिल। सौ-जिला प्रशासन
HighLights
UNESCO संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास तेज।
वाणावर पहाड़ी पर 72 करोड़ रुपये से पर्यटन विकास कार्य जारी।
रोपवे, इको टूरिज्म हब से रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा।
जागरण संवाददाता, जहानाबाद। जिले की ऐतिहासिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है।
मौर्यकालीन स्थापत्य कला और प्राचीन इतिहास की अनमोल धरोहर वाणावर एवं नागार्जुनी गुफाओं को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास तेज किए गए हैं।
इसी क्रम में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और जहानाबाद की जिलाधिकारी छिरिंग वाई भूटिया के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक
बैठक में इन गुफाओं के ऐतिहासिक, पुरातात्त्विक और सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय ही नहीं, वैश्विक पहचान दिलाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
जिलाधिकारी ने विशेष वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से गुफाओं की विशिष्ट स्थापत्य शैली, गौरवशाली अतीत और पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित किया।
इन गुफाओं की प्राचीनता और शिल्पकला भारतीय इतिहास की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है। इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने से बिहार की ऐतिहासिक विरासत को व्यापक मंच उपलब्ध हो सकता है।
सुधा मूर्ति के प्रयासों का किया उल्लेख
इस पहल को आगे बढ़ाने में राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति की भूमिका का उल्लेख करते हुए जिला प्रशासन ने उनके प्रति आभार जताया।
प्रशासन के अनुसार, उन्होंने इन ऐतिहासिक गुफाओं को वैश्विक पहचान दिलाने के विषय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाया।
साथ ही उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने और इस दिशा में सहयोग देने के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय तथा बिहार सरकार के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया।
पर्यटन और रोजगार की बढ़ेंगी संभावनाएं
जिलाधिकारी ने कहा कि ये गुफाएं बिहार की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर हैं। इन्हें वैश्विक पहचान मिलने से इनके संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा।
साथ ही, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल होना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना नहीं है, बल्कि उस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इन गुफाओं को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने के लिए प्रयास जारी रहेगा।
पहाड़ी क्षेत्र में पर्यटन और बुनियादी ढांचे का विकास
वर्तमान में वाणावर पहाड़ी क्षेत्र में पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े कई कार्य किए जा रहे हैं। लगभग 23 करोड़ की लागत से रोपवे का निर्माण अंतिम चरण में है।
इससे पर्यटकों को सिद्धेश्वर नाथ मंदिर तक पहुंचने में आसानी होगी। वन विभाग द्वारा लगभग 49 करोड़ की लागत से वाणावर को इको टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
पर्यटकों को ग्रामीण जीवन का अनुभव कराने के लिए यहां पारंपरिक मिट्टी के कॉटेज बनाए जा रहे हैं। पातालगंगा से लेकर लगभग 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित प्राचीन सिद्धेश्वर नाथ मंदिर तक आवागमन को सुगम बनाने के लिए सीढ़ियों और बुनियादी सुविधाओं का विकास किया गया है।
