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Gopalganj News: 36 साल पुराने इस मामले की कोर्ट में हुई सुनवाई, अब अदालत ने DGP को दे दिया ये आदेश

शनिवार को गोपालगंज के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 मानवेंद्र मिश्र की अदालत में डकैती के दौरान हत्या के मामले में सुनवाई हुई। अब अदालत को साल 1988 में हुई डकैती के दौरान हत्या के मामले में 30 वर्षों से अनुसंधानकर्ता व चिकित्सक के साक्ष्य का इंतजार है। अदालत ने डीजीपी को इस मामले में सरकारी गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

By Mithilesh Tiwari Edited By: Shoyeb Ahmed Sun, 02 Jun 2024 08:54 AM (IST)
36 साल पुराने इस मामले की कोर्ट में हुई सुनवाई

जागरण संवाददाता, गोपालगंज। वर्ष 1988 में हुई डकैती के दौरान हुई हत्या के मामले में न्यायालय को 30 वर्षों से अनुसंधानकर्ता व चिकित्सक के साक्ष्य का इंतजार है। लंबी अवधि बीतने के बाद भी करीब 36 साल पुराने मामले की सुनवाई अब भी चल रही है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-10 मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने शनिवार को सुनवाई के दौरान इस पुराने मामले को गंभीरता से लिया। अदालत ने डीजीपी को इस मामले में सरकारी गवाहों को 15 जून को न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश दिया। इनमें कांड के अनुसंधानकर्ता तथा पोस्टमॉर्टम करने वाले चिकित्सक भी शामिल हैं।

शनिवार को हुई सुनवाई

शनिवार को इस कांड की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि कुल छह आरोपित के खिलाफ यह मामला लंबित था। इनमें से चार की मौत हो चुकी है। दो आरोपित गोपाल साह व मोहड़ दास अब भी सरकारी गवाहों के अदालत में आने का इंतजार कर रहे हैं।

एडीजे दस मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने पुलिस के कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शीघ्र विचारण प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, जिसका उल्लंघन अभियोजन के स्तर पर किया जा रहा है।

अदालत ने डीजीपी को दिया निर्देश

अभियोजन स्वयं के सरकारी साक्षी पुलिस एवं चिकित्सक को साक्ष्य देने के लिए नहीं ढूंढ़ पा रही है। अदालत ने डीजीपी को निर्देश दिया कि मामले के सभी तत्कालीन बरौली थाना के अनुसंधानकर्ता अनि आरएन दुबे, अनि आर पासवान व अनि टीएन सिंह एवं चिकित्सक को 15 जून को अपने स्तर से उपस्थित कराना सुनिश्चित करें।

अगर पुलिस साक्षी या चिकित्सक का स्थानांतरण हो गया है, अथवा वे सेवानिवृत्त हो गए हों तो उनके वर्तमान पदस्थापन, स्थाई पता पर सूचित करें। अगर उनमें किसी की मौत हो गई हो तो मृत्यु प्रमाण पत्र कोर्ट को प्रस्तुत कराएं। अन्यथा अभियोजन साक्ष्य का अवसर समाप्त कर दिया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेवारी अभियोजन विभाग की होगी।

1994 में आरोपितों के खिलाफ किया आरोप गठित

डकैती के दौरान हत्या के इस मामले में 26 मई, 1994 को सभी छह अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप गठन किया गया। 26 मई 1994 को अभियोजन ने मृतक के पुत्र हीरालाल साह को अभियोजन साक्षी संख्या एक के रूप में प्रस्तुत किया।

वर्ष 2004 में इस मामले में अंतिम साक्षी का साक्ष्य हुआ। करीब बीस साल से इस मामले में कोई भी साक्षी अदालत में प्रस्तुत नहीं हुआ है।

विचारण के क्रम में चार आरोपितों की हो गई मौत

डकैती के दौरान हत्या के इस मामले के विचारण के क्रम में चार आरोपित राजनाथ सिंह, लंगटु दास, ज्ञानी दास तथा मड़ई दास की मृत्यु हो चुकी है। उनकी मौत के बाद अदालत में मृत्यु प्रमाण पत्र भी जमा हो चुका है। वर्तमान में दो आरोपित गोपाल साह व मोहड़ दास के विरुद्ध यह मामला चल रहा है।

डकैती के दौरान बिरछा साह की गोली मार कर की थी हत्या

सिधवलिया थाना के झझवां गांव तब बरौली थाना क्षेत्र में था। आठ नवंबर 1988 की रात में बिरछा साह के घर में डकैती की घटना को अंजाम दिया गया। तब डकैतों ने गोली मारकर बिरछा साह की हत्या कर दी थी। इस मामले में गणेश साह के बयान पर बरौली थाना में प्राथमिकी (कांड संख्या- 195/1988) की गई।

इसमें राजनाथ सिंह, मरई दास, गोपाल साह, लंगटू दास, मोहर दास एवं ज्ञानी दास सहित अन्य अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया था।

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