गोपालगंज: 16 साल पहले जमीन की रजिस्ट्री में गवाह बना, अब उसी जमीन का करा दिया बैनामा
गोपालगंज में जमीन धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है, जिसमें 16 साल पहले रजिस्ट्री में गवाह बने व्यक्ति ने ...और पढ़ें

16 साल पहले जमीन की रजिस्ट्री में गवाह बना, अब उसी जमीन का करा दिया बैनामा (AI Generated Image)
जागरण संवाददाता, गोपालगंज। जमीन की खरीद-बिक्री में धोखाधड़ी का एक मामला बरौली थाना क्षेत्र के नधना गांव से सामने आया है। आरोप है कि जिस व्यक्ति ने 16 साल पहले जमीन की रजिस्ट्री में गवाह और पहचानकर्ता की भूमिका निभाई थी, उसी ने कथित तौर पर सहयोगियों के साथ मिलकर उस जमीन का दोबारा बैनामा करा दिया।
मामले में पीड़ित परशुराम सिंह ने पुलिस से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। वह डीएसपी से मिलकर भी कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।
पीड़ित के आवेदन के अनुसार, उन्होंने 27 अप्रैल 2009 को जलपुरवा में सर्वे नंबर 1002, खाता नंबर छह की 10 डिसमिल जमीन रामबदन सिंह से रजिस्ट्री कराई थी। इस रजिस्ट्री के दौरान मांझागढ़ थाना क्षेत्र के कल्याणपुर गांव निवासी दूसरे परशुराम सिंह गवाह व पहचानकर्ता बने थे।
जमीन की रजिस्ट्री के बाद पीड़ित को दखल-कब्जा मिल गया। साथ ही जमीन की दाखिल-खारिज कराकर जमाबंदी भी उनके नाम पर दर्ज हो गई। इस मामले में पीड़ित के आवेदन पर बरौली थाना की पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
17 जुलाई 2025 को दूसरे के नाम कराया बैनामा
आरोप है कि वर्ष 2009 में गवाह और पहचानकर्ता बने कल्याणपुर निवासी परशुराम सिंह ने अपने सहयोगियों शिवजी चौधरी और रामनरेश राम के साथ मिलकर साजिश रची। इसके बाद 17 जुलाई 2025 को उसी जमीन का बैनामा जलपुरवा गांव की सुनैना देवी के नाम करा दिया गया।
दोनों पक्षों में परशुराम सिंह नाम का व्यक्ति होने के कारण पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा होने की बात भी सामने आई है। पीड़ित को मामले की जानकारी तब हुई, जब कुछ दिन पहले सुनैना देवी अपने परिवार के सदस्यों के साथ जमीन पर कब्जा करने पहुंचीं।
इसके बाद परशुराम सिंह ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। उन्होंने पांच अक्टूबर को गोपालगंज निबंधन कार्यालय से दूसरे बैनामे की प्रमाणित नकल निकलवाई। दस्तावेज मिलने के बाद उन्हें पता चला कि जिस जमीन की रजिस्ट्री वह पहले ही करा चुके थे, उसी जमीन का दोबारा बैनामा कराया गया है।
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
मामले को लेकर गांव में पंचायत भी बुलाई गई, लेकिन पीड़ित के अनुसार, आरोपित पक्ष ने पंचायत में आने से मना कर दिया। इस पूरे प्रकरण में बरौली अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पीड़ित का आरोप है कि दूसरे बैनामे के आधार पर जमीन की दाखिल-खारिज भी करा ली गई। ऐसे में यह जांच का विषय है कि पहले से दर्ज जमाबंदी और उपलब्ध पुराने राजस्व अभिलेखों के बावजूद दूसरी दाखिल-खारिज किस आधार पर की गई।
पीड़ित ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन से संबंधित दस्तावेजों की सत्यता की पड़ताल करने तथा कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही उन्होंने कहा है कि जांच में किसी सरकारी कर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। अब पुलिस और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
