कमर तक पानी, सिर से छत गायब... गोपालगंज में बाढ़ के बीच बेबसी में कट रही जिंदगी
गोपालगंज के मांझा प्रखंड की कई पंचायतों में बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, जहां घरों में पानी घुसने से लोग बेबसी में दिन गुजार रहे हैं।
HighLights
मांझा प्रखंड की पंचायतों में बाढ़ से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त।
घरों में कमर तक पानी, लोग बेबसी में दिन गुजार रहे।
फसल, चारा, भोजन की चिंता, परिवार पानी उतरने का इंतजार।
राजेश प्रसाद, मांझा (गोपालगंज)। चारों तरफ पानी है...। घर के भीतर भी और बाहर भी। सिर पर छत नहीं तो आसमान ही सहारा है। जहां कभी चूल्हे पर भोजन पकता था, वहां अब पानी लहरें मार रहा है।
मांझा प्रखंड की निमुईया, गौसिया, भैसही और पुरैना पंचायतों में बाढ़ ने जिंदगी का पूरा तौर-तरीका बदल दिया है। कहीं घरों में कमर तक पानी है तो कहीं आंगन और चूल्हा डूब चुका है।
जरूरी सामान चौकी और ऊंची जगहों पर समेटकर परिवार किसी तरह दिन काट रहे हैं। रात होते ही बच्चों और बुजुर्गों की चिंता और बढ़ जाती है। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं तो कुछ पानी से घिरे घरों में ही रहने को मजबूर हैं।
पानी में खड़े होकर पक रहा भोजन
निमुईया गांव में बाढ़ की तस्वीर लोगों की बेबसी की पूरी कहानी कहती है। घर में घुसे पानी के बीच एक महिला घुटनों और कमर तक पानी में खड़ी होकर भोजन बनाने में जुटी है।
घर का जरूरी सामान ऊंची जगह पर रखा गया है। बच्चे और बुजुर्ग चौकी पर बैठकर भोजन कर रहे हैं। यही चौकी अब बिस्तर भी है और भोजन की जगह भी। घर से बाहर निकलना हो तो नाव का सहारा लेना पड़ता है।
घर में पानी, ऊपर खुला आसमान
बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ लोगों की रातें भी मुश्किल होती जा रही हैं। घर के अंदर पानी और बाहर भी पानी। ऐसे में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है।
कई परिवार जरूरी सामान लेकर ऊंचे स्थानों की ओर चले गए हैं। वहीं, जिनके पास दूसरा ठिकाना नहीं है, वे पानी से घिरे अपने घरों में ही टिके हुए हैं।
फसल, चारा और भोजन की चिंता
बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने सिर्फ घर बचाने की चुनौती नहीं है। खेतों में लगी फसल डूबने की चिंता है तो मवेशियों के लिए चारे का इंतजाम भी मुश्किल हो गया है।
बच्चों के भोजन और सुरक्षा को लेकर स्वजन परेशान हैं। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी के बीच जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों की निगाह अब पानी के उतरने पर टिकी है। उनके लिए यह सिर्फ बाढ़ का पानी नहीं, बल्कि हर दिन और हर रात संघर्ष की नई कहानी है।
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