विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

500 रुपये की पूंजी, 5 लाख का बैंक लोन और तीन मशीनें; गोपालगंज की बसंती देवी ने ऐसे पाई सफलता

Published: Sat, 10 Oct 2026 10:24 PM (IST)

गोपालगंज की बसंती देवी ने मात्र 500 रुपये से अगरबत्ती का कारोबार शुरू किया, जो अब प्रतिदिन 50 किलो से ...और पढ़ें

अगरबत्‍ती बनातीं मह‍िलाएं। जागरण

अगरबत्‍ती बनातीं मह‍िलाएं। जागरण

HighLights

  1. बसंती देवी ने 500 रुपये से अगरबत्ती व्यवसाय शुरू किया।

  2. जीविका और ऋण से कारोबार को विस्तार दिया।

  3. अब 6 लोगों को रोजगार, प्रतिदिन 50 किलो उत्पादन।

संवाद सूत्र, मांझा (गोपालगंज)। महज 500 रुपये की पूंजी से शुरू हुआ कारोबार आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है।

मांझा प्रखंड के आलापुर गांव की बसंती देवी कभी आर्थिक तंगी से जूझती थीं, लेकिन अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने अगरबत्ती उद्योग खड़ा कर लिया।

वर्ष 2017 में घर से शुरू किया गया उनका छोटा-सा कारोबार अब विस्तार ले चुका है। आज वह प्रतिदिन 50 किलो से अधिक अगरबत्ती का उत्पादन कर रही हैं और छह लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।

आलापुर की बसंती देवी ने मेहनत से बदली तकदीर

बसंती की सफलता का सफर आसान नहीं रहा। कारोबार शुरू करने पर उन्हें लोगों के विरोध और तानों का सामना करना पड़ा।

शुरुआती दिनों में अगरबत्ती की बिक्री करना भी चुनौती थी। हालांकि, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए गांव की महिलाओं को उधार पर अगरबत्ती बेचनी शुरू की।

धीरे-धीरे लोगों को उनके उत्पाद पसंद आने लगे और मांग बढ़ने के साथ कारोबार भी आगे बढ़ने लगा।

जीविका से जुड़कर मिली कारोबार को नई उड़ान

कारोबार को विस्तार देने के लिए बसंती देवी जीविका समूह से जुड़ीं। यहां से उन्हें 50 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि से उन्होंने कच्चे माल की खरीद बढ़ाई और उत्पादन को गति दी।

उनकी मेहनत और लगन को देखते हुए जीविका ने उन्हें बैंक मित्र के रूप में काम करने का अवसर दिया। इसके बाद वह सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मांझा शाखा में बैंक मित्र के तौर पर काम करने लगीं।

बैंकिंग से जुड़े काम के साथ उन्होंने अगरबत्ती कारोबार को भी जारी रखा। इससे उन्हें आय के अतिरिक्त अवसर मिले और अपने उद्यम को आगे बढ़ाने का हौसला मिला।

पांच लाख रुपये के ऋण से खरीदीं तीन मशीनें

अगरबत्ती उद्योग को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए बसंती देवी ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत बैंक से पांच लाख रुपये का ऋण लिया। वर्ष 2023 में इस राशि से अगरबत्ती बनाने और सुखाने के लिए तीन ऑटोमेटिक मशीनें खरीदीं।

मशीनों की मदद से उत्पादन क्षमता बढ़ी और कारोबार को व्यवस्थित रूप मिला। अब वह अगरबत्ती के साथ धूपबत्ती और मच्छर भगाने वाली अगरबत्ती का भी उत्पादन कर रही हैं। उत्पादों की विविधता से उनके कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।

कई इलाकों में पहुंच रहे उत्पाद, छह लोगों को रोजगार

वर्तमान में बसंती देवी प्रतिदिन 50 किलो से अधिक अगरबत्ती का उत्पादन कर रही हैं। उनके उत्पादों की मांग मांझा के स्थानीय बाजारों के अलावा थावे, धर्मपरसा, बड़हरिया और आसपास के क्षेत्रों में भी है।

कारोबार से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और छह लोगों को नियमित काम मिल रहा है। बसंती देवी की कहानी बताती है कि सीमित पूंजी और शुरुआती मुश्किलें उद्यम की राह रोक नहीं सकतीं।

मेहनत, बाजार की जरूरतों को समझने और उपलब्ध योजनाओं का लाभ उठाने से छोटे कारोबार को भी आगे बढ़ाया जा सकता है। उनका सफर ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने और अपने स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने की प्रेरणा है।

यह भी पढ़ें- पटना में गंगा किनारे जिंदगी खत्म करने पहुंची मां ने बदला फैसला, 400 रुपये से खड़ा किया 1.5 करोड़ का कारोबार