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पटना में गंगा किनारे जिंदगी खत्म करने पहुंची मां ने बदला फैसला, 400 रुपये से खड़ा किया 1.5 करोड़ का कारोबार

Published: Sat, 10 Oct 2026 10:23 PM (IST)

पटना की खुशबू कुमारी ने मात्र 400 रुपये और दो बच्चों के साथ जीवन की नई शुरुआत की, जब परिवार ...और पढ़ें

खुशबू कुमारी अपने कार्यालय में कंपनी के उत्‍पादों के साथ।

खुशबू कुमारी अपने कार्यालय में कंपनी के उत्‍पादों के साथ। 

HighLights

  1. खुशबू कुमारी ने 400 रुपये से शुरू किया सफल व्यवसाय।

  2. दिव्य मैन्युफैक्चरिंग का वार्षिक टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये।

  3. 100 से अधिक लोगों को मिला प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार।

जागरण संवाददाता, पटना। गंगा किनारे जिंदगी खत्म करने का ख्याल लेकर पहुंची एक मां ने उसी में स्नान कर नई जिंदगी शुरू करने का संकल्प लिया।

जेब में कुल चार सौ रुपये थे और साथ में दो छोटे बच्चे। परिवार ने साथ छोड़ दिया था लेकिन बच्चों के भविष्य ने उन्हें हार मानने नहीं दी।

2017 में 27 वर्ष की उम्र में खेमनीचक निवासी खुशबू कुमारी ने जिस संघर्ष की शुरुआत की, आज वह करीब डेढ़ करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर वाला कारोबार बन चुका है।

आज 100 लोगों को दे रहीं राेजगार

कभी उधार लेकर काम शुरू करने वाली खुशबू आज क्लीनिंग, हाइजीन व हेल्थ केयर उत्पादों के निर्माण और वितरण में पहचान बना चुकी हैं। उनके उत्पाद पूरे बिहार में बिक रहे हैं और अब यूपी समेत कई राज्यों में विस्तार की योजना है।

घर-घर डिटरजेंट पाउडर, फिर शृंगार की दुकान अब दिव्य मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन चुकी है। आज वे 100 से अधिक लाेग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रही हैं।

बच्चों का भविष्य संवारने की अंतिम कोशिश लाई रंग

खुशूबू कुमारी ने बताया कि गंगा से लौटने के क्रम में मन में बस एक ही धुन थी कि मरने के पहले बच्चों का भविष्य संवारने की अंतिम कोशिश क्यों न की जाए?

यहीं से सफलता का सफर शुरू हुआ। जिस किराये के मकान में रहती थी, वहां दोबारा रहने की अनुमति मांगी। फिर परिचितों से पांच-पांच सौ रुपये उधार लेकर काम शुरू किया।

मैं चाहती थी कि ऐसा कारोबार करूं, जो लोगों की दिनचर्या में शामिल हो। इसलिए डिटर्जेंट पाउडर, केक व बाथरूम क्लीनर की ट्रेडिंग शुरू की। पूंजी कम थी लेकिन विश्वास था कि मेहनत करूंगी तो रास्ता निकलेगा।

कुछ पैसे आए तो लगा कि दूसरों के उत्पाद बेचने के बजाय खुद का सामान बनाना चाहिए। मैंने रसायनशास्त्र में आनर्स किया था इसलिए उत्पाद बनाने की प्रक्रिया समझने में मदद मिली।

मुद्रा लोन व पीएमईजीपी से मिली मदद

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत पंजाब नेशनल बैंक से 9 अगस्त 2019 को 1.95 लाख रुपये का ऋण मिला। इसके बाद हैंडवाश, ब्लैक फिनायल, डिटर्जेंट पाउडर और बाथरूम क्लीनर बनाना शुरू किया।

सामान बनाना आसान था, उसे बाजार तक पहुंचाना, ग्राहकों का भरोसा जीतना और बड़े ब्रांडों के बीच पहचान बनाना मुश्किल।

कई बार मुश्किलें आईं, कभी बिक्री की चिंता तो कभी आगे बढ़ने के लिए पैसों की। कई बार गिरी लेकिन हर बार फिर खड़ी हुई।

वर्ष 2022 में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत 10 लाख रुपये की परियोजना के लिए नौ लाख रुपये का बैंक ऋण मिला।

प्रशिक्षण और बैंकिंग सहयोग से कारोबार व्यवस्थित हुआ। धीरे-धीरे ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग और वितरण तक का सफर तय हुआ।

2026 में पीएमईजीपी-2 के तहत एक करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिलने के बाद दिव्य मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के रूप कंपनी बड़ी हुई। आज मेरे उत्पाद पूरे बिहार में बिक रहे हैं।

महिलाएं, आर्थिक रूप से परिवार पर न रहें निर्भर 

खुशबू चाहती हैं कि महिलाएं, पहले पिता-भाई व बाद में पति-पुत्र पर आर्थिक रूप से निर्भर रहती हैं। उन्हें खुद कमाने और अपने फैसले लेने की स्थिति में आना चाहिए।

कई महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया लेकिन इसमें बहुत मेहनत होने के कारण वे आगे नहीं आना चाहतीं।