बिहार के 4 जिलों से गुजरेगा 1,248 करोड़ का वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे, गया में विकास की नई राह
वाराणसी-रांची-गया भाया कोलकाता सिक्स-लेन एक्सप्रेस-वे इमामगंज, गया सहित बिहार के कई जिलों में विकास, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खोलेगा।

गया के इमामगंज में एक्सप्रेस वे का निरीक्षण करते एनएचएआई के पदाधिकारी। जागरण
HighLights
इमामगंज, गया में विकास और कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा।
वाराणसी-कोलकाता यात्रा समय घटकर होगा लगभग पांच-छह घंटे।
वन्यजीव सुरक्षा हेतु ओवरपास, अंडरपास और 50 हजार पौधे।
नीरज कुमार, इमामगंज (गया)। कभी माओवादी प्रभाव के लिए चर्चित रहे गया जिले के इमामगंज क्षेत्र में अब विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की नई उम्मीद जगी है।
वाराणसी-रांची-गया भाया कोलकाता सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे इस क्षेत्र की तस्वीर संवारकर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इसके निर्माण से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि पर्यटन, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
672 किलोमीटर लंबी इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना से वाराणसी से कोलकाता के बीच यात्रा का समय मौजूदा 10 से 12 घंटे से घटकर करीब पांच से छह घंटे होने का अनुमान है।
बिहार में इसका लगभग 162 किलोमीटर हिस्सा बनाया जाना है। राज्य में परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना की प्रगति से अवगत कराने के लिए शुक्रवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से मीडिया भ्रमण आयोजित किया गया।
इस दौरान अधिकारियों ने गया जिले के इमामगंज प्रखंड के चपरी गांव के समीप चल रहे निर्माण कार्य की जानकारी दी।
बिहार के तीन जिलों को मिलेगा लाभ
एनएचएआइ के औरंगाबाद परियोजना निदेशक देवेंद्र बंसल ने बताया कि एक्सप्रेस-वे बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
इससे इन इलाकों की सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होगी और पर्यटन व आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। परियोजना का सातवां चरण गया जिले में है।
एक्सप्रेस-वे के चालू होने से एनएच-19 पर भारी वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसके साथ ही गया के डोभी में विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर को भी एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की योजना है। इससे उद्योगों के लिए परिवहन सुगम होने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

(इमामगंज के बसेता में वाराणसी-रांची-कोलकता ऐक्सप्रेस वे को लेकर प्रेसवार्ता करते एनएचआई औरंगाबाद के परियोजना निदशक देवेंद्र बंसल एवं अन्य पदाधिकारी। जागरण)
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बनेंगे ओवरपास-अंडरपास
परियोजना के तहत बिहार के कैमूर और गया जिलों में लगभग पांच किलोमीटर का हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। यहां वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ओवरपास और अंडरपास बनाने की योजना है।
पूरे एक्सप्रेस-वे पर करीब 50 हजार पौधे लगाने का भी प्रस्ताव है, ताकि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिले।
हर 30 किलोमीटर पर ट्रामा सेंटर
अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक्सप्रेस-वे पर हर एक किलोमीटर पर उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे लगाने और प्रत्येक 30 किलोमीटर पर ट्रामा सेंटर बनाने की योजना है।
इससे सड़क दुर्घटनाओं की निगरानी और घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
चार राज्यों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेस-वे
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रिवासा से शुरू होकर चंदौली, बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया होते हुए झारखंड तथा पश्चिम बंगाल तक पहुंचेगा।
इसके मार्ग में चतरा, हजारीबाग, रांची, बोकारो, धनबाद, रामगढ़ और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया व बांकुड़ा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अंततः यह कोलकाता से जुड़ेगा।
एक्सप्रेस-वे के निर्माण से चार राज्यों के बीच संपर्क मजबूत होने के साथ माल परिवहन और यात्रियों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है।
इमामगंज और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह परियोजना बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटन विस्तार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर लेकर आ सकती है।
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