यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आज पहली सोमवारी, देवकुंड मंदिर में भक्तों की लगी है कतार, एक ही रात में इस प्रकार हो गया था मंदिर का निर्माण
अनुमंडल मुख्यालय से करीब 29 किलोमीटर दूर स्थित है देवकुंडधाम। सूर्य मंदिर के लिए जिस तरह औरंगाबाद में देव विख्यात ...और पढ़ें

औरंगाबादः जिले के दाउदनगर अनुमंडल मुख्यालय से करीब 29 किलोमीटर दूर स्थित है देवकुंडधाम। सूर्य मंदिर के लिए जिस तरह औरंगाबाद में देव विख्यात है उसी तरह शिवालय के रूप में देवकुंड का महत्व है। कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में देव, उमगा और देवकुंड मंदिर का निर्माण किया था। यहां प्रत्येक वर्ष सावन में भीड़ जुटती है। प्रत्येक सोमवार को लगभग एक लाख श्रद्धालु विभिन्न इलाकों से पहुंचते हैं। हाल ही में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया है।
यह स्थान है प्रसिद्ध
यह स्थान प्रसिद्ध है और श्रद्धालु यहां अपनी मन्नत मांगने आते हैं। बाबा दूधेश्वर नाथ का इतिहास यहां भगवान राम के चरण पड़े। त्रेता युग में भगवान राम जब अपने पिता का श्राद्ध करने गया जा रहे थे तो देवकुंड आए। जहां च्यवन ऋषि ने उनका स्वागत किया और उन्होंने यहां के सहस्रधारा तालाब में स्नान कर रामेश लिंग की स्थापना की। यहां के शिवलिंग को बाबा दूधेश्वर नाथ के नाम से जाना जाता है।
यहां एक मठ है जिसके संस्थापक बाबा बाला पूरी जी थे। इस मठ को बेलखारा के यशवंत सिंह ने 300 बीघा जमीन दान दी थी। यह गिरनार पर्वत जूनागढ़ के नागा संयासियों की शाखा है। टेकारी राज की महारानी ने यहां कुंड के घाटों का जीर्णोद्धार करीब 90 वर्ष पूर्व कराई थी।
कैसे पहुंचे
पटना-औरंगाबाद मुख्य पथ व दाउदनगर गया पथ से नजदीक है देवकुंडधाम। औरंगाबाद-पटना मुख्य पथ स्थित दाउदनगर भखरुआं मोड़ से पूरब दिशा में गया रोड नेशनल हाईवे 120 पर 10 किलोमीटर दूर स्थित है पचरुखिया। यहां से हसपुरा होते हुए करीब 19 किलोमीटर दूर स्थित है देवकुंड। अच्छी सड़क की सुविधा उपलब्ध है। किसी भी तरह के वाहन से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
दूधेश्वरनाथ मठ के महंत कन्हैयानंद पुरी ने बताया कि सावन मास में श्रद्धालुओं के दर्शन की तैयारी मठ की तरफ से भी की गई है और प्रशासन की तरफ से भी। दो साल कोविड- 19 के कारण श्रद्धालुओं की संख्या ना के बराबर थी। इस बार भीड़ अधिक होने की उम्मीद के साथ तैयारी की गई है।
देवकुंडधाम प्रत्येक वर्ष सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को पहुंचकर दर्शन करने वाले चितरंजन सिंह उर्फ लीडर कहते हैं कि यहां आने से मन को सुकून और शांति मिलती है। हर मनोकामना पूर्ण होती है। कोई शत्रु भी क्षति पहुंचाने में सफल नहीं होता। इतनी बाबा की कृपा बरसती है।
चितरंजन सिंह उर्फ लीडर, बिगन बिगहा, दाउदनगर
