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थाईलैंड में गूंजा गयाजी की संस्कृत विदुषी का व्याख्यान, डॉ. संगीता आर्या ने कहा- आयुर्वेद भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर

Published: Mon, 05 Oct 2026 03:06 PM (IST)

गया कॉलेज की डा. संगीता आर्या ने थाईलैंड में आयोजित पांचवीं अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल संस्कृत संगोष्ठी में आयुर्वेद पर व्याख्यान दिया। ...और पढ़ें

आयुर्वेद को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर

आयुर्वेद को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर

HighLights

  1. डा. संगीता आर्या ने थाईलैंड में आयुर्वेद पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया।

  2. आयुर्वेद को भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर बताया गया।

  3. शरीर, मन, आत्मा के संतुलन पर आयुर्वेद की पद्धति समझाई।

जागरण संवाददाता, गयाजी। भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत के अध्ययन को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में गया कालेज की सहायक प्रोफेसर एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. संगीता आर्या ने उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकाक स्थित शिल्पकोर्न विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पांचवीं अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल संस्कृत संगोष्ठी में उन्होंने रिसोर्स पर्सन के रूप में व्याख्यान दिया।

उनके व्याख्यान का विषय ‘आयुर्वेद: पारंपरिक चिकित्सापद्धतिश्च’ रहा। भारत सरकार द्वारा संचालित संस्कृत अध्ययन केंद्र एवं ग्लोबल संस्कृत फोरम, भारत के संयुक्त तत्वावधान में 28 से 30 सितंबर तक संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका विषय ‘इंडियन नालेज सिस्टम्स: ब्रिजिंग कल्चर्स एंड नालेज ट्रेडिशन्स’ था।

आयुर्वेद को बताया भारतीय ज्ञान परंपरा की धरोहर

डा. संगीता आर्या ने अपने शोध पत्र के माध्यम से आयुर्वेद को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक ज्ञानधारा से जोड़ने में आयुर्वेद सेतु की भूमिका निभा सकता है।

शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर जोर

उन्होंने चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय जैसे प्राचीन ग्रंथों का उल्लेख करते हुए बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन जीने की समग्र पद्धति है। इसमें शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर विशेष बल दिया गया है।

योग, प्राणायाम, आहार, दिनचर्या, ऋतुचर्या, जड़ी-बूटियां और पंचकर्म जैसी विधियों का भी उन्होंने उल्लेख किया। उनके व्याख्यान को देश-विदेश से आए विद्वानों और शोधार्थियों ने सराहा।

संगोष्ठी में प्रस्तुत हुए करीब 300 शोध पत्र

संगोष्ठी में लगभग 300 शोध पत्र आफलाइन और आनलाइन माध्यम से प्रस्तुत किए गए। भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय सचिव डा. राजेश मिश्रा ने प्रतिभागियों और अतिथियों का स्वागत किया।

डा. संगीता आर्या की उपलब्धि पर मगध विश्वविद्यालय, गया कालेज, संस्कृत विभाग और शिक्षाविदों में हर्ष है। शिक्षाविदों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका व्याख्यान गया कालेज और गयाजी के लिए गौरव का विषय है।