अमित कुमार सिंह, बाराचट्टी (गया)। बिहार के गया जिले में बाराचट्टी और आसपास करीब एक हजार एकड़ भूमि पर अफीम की खेती की जा रही है। करीब सौ गांवों में इसकी खेती की जा रही है। अधिसंख्य गांव जंगली इलाके में हैं। यह झारखंड के चतरा जिले का सीमावर्ती क्षेत्र है।

बाराचट्टी अफीम की खेती को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी कुख्यात है। यहां से आठ राज्यों पश्चिम बंगाल, पंजाब, उत्तरप्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक कारोबार होता है, जबकि अफीम प्रतिबंधित है। इससे नक्सलियों का भी कनेक्शन है, हालांकि अब उसमें कमी आई है।

यहां से अफीम और डोडा की आपूर्ति की जाती है। इस कारोबार से तीन हजार से अधिक परिवारों के लोग जुड़े हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे का क्षेत्र होने के कारण इसका नेटवर्क लाइन होटलों से भी जुड़ा है। पिछले कुछ वर्षो से प्रशासन ने इस पर नकेल कसी है। जिला पुलिस, एसएसबी, वन विभाग और नारकोटिक्स के सहयोग से पिछले साल ही 467 एकड़ में अफीम की खेती नष्ट की गई। इसके बावजूद जंगली इलाकों में खेती से लेकर खरीद-बिक्री का कारोबार चल रहा है। प्रशासन के कड़े रुख के बाद वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर बनाए गए लाइन होटलों को हटाने की कार्रवाई की गई। लेकिन कारोबारी नए-नए रास्ते ढूंढ ले रहे हैं। अभी भी राजमार्ग किनारे स्थित कुछ होटलों से कारोबार चल रहा है। अफीम माफिया खेती के लिए नवंबर से ही सुरक्षित जमीन की तलाश में जुट जाते हैं। यह जमीन जंगलों के बीच होती है, जहां आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता है। जिसकी जमीन ली जाती है, उन्हें गेहूं की उपज के बराबर रकम दी जाती है। साथ ही मजदूरी भी। जंगल से जीटी रोड तक पहुंचाई जाती है अफीम :

जंगली क्षेत्रों से जीटी रोड अफीम पहुंचाने का काम मजदूर करते हैं। इसमें महिलाओं का भी सहयोग लिया जाता है। इसके बाद इसे बस-ट्रक आदि से दूसरे राज्यों तक भेजा जाता है। प्रशासन की दबिश बढ़ने के बाद अब नया तरीका ढूंढा गया है। अब वे जीटी रोड के किनारे बताई हुई जगह पर अफीम रखकर चले जाते हैं और माफिया उसे वहां से उठा लेते हैं। इस दौरान आसपास पूरी नजर रखी जाती है कि कहीं पुलिस तो नहीं है। अगर खतरा दिखता है तो उसे यूं ही छोड़ दिया जाता है।

-- कोट---

बाराचट्टी प्रखंड में जहां अफीम की खेती होती थी, उस जगह पर वन विभाग लेमन ग्रास की खेती कराने जा रहा है। अफीम की खेती करने वाले किसानों को जागरूक करने के लिए वनरक्षी को लगाया गया है। अभी अफीम की खेती नहीं हो रही है। इसकी शुरुआत नवंबर में होती है। इसलिए वन विभाग की भूमि को सुरक्षित रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। माफिया पर भी शिकंजा कसा जा रहा है।

-मो. अफसार, वन पदाधिकारी बाराचट्टी, गया

Posted By: Jagran

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस