कमल नयन, गया

चुनावी आहट के बीच 31 अक्टूबर को गया में होने वाले जदयू के प्रमंडलीय दलित-महादलित प्रकोष्ठ सम्मेलन के कई मायने हैं। यहां से अनुसूचित जाति के लोगों को एक संदेश देने की कोशिश की जाएगी, इसलिए पार्टी नेता दिन-रात विभिन्न इलाकों में संपर्क कर बड़ी संख्या में लोगों को लाने की तैयारी कर रहे हैं।

यह सम्मेलन हम पार्टी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के लिए भी चुनौती होगा। परोक्ष रूप से निशाने पर वे ही होंगे। एनडीए से अलग होने के बाद मांझी सरकार पर लगातार प्रहार कर रहे हैं कि नीतीश कुमार ने अनुसूचित जाति समुदाय के लिए कुछ नहीं किया है। मगध प्रमंडल में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने जो भी योजनाएं बनाई, उसे फाइलों में बंद कर दिया गया है। इस सम्मेलन के माध्यम से इसका भी जवाब देने की कोशिश होगी। यह पहली बार है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसमें भाग लेने खुद आ रहे हैं। इसलिए इसके बड़े राजनीतिक मायने लगाए जा रहे हैं। यहां से पूरे राज्य को एक संदेश देने की कोशिश होगी। भाजपा-जदयू में सीटों का भी बंटवारा करीब-करीब हो चुका है। गया की सीट फिलहाल भाजपा के कब्जे में है। यहां अनुसूचित जाति-जनजाति के मतदाता बड़ी संख्या में है, इसलिए उनका वोट काफी मायने रखता है। इस क्षेत्र से आने वाले जीतनराम की भी इन वोटरों में अच्छी पैठ है। वर्ग विशेष के मतदाताओं के लिए आयोजित सम्मेलन जदयू का का एक सियासी कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम भी होंगे। इसके माध्यम से एक-एक सवालों और लगातार लगाए जाने वाले आरोपों का भी जवाब दिया जाएगा। पार्टी के युवा प्रदेश अध्यक्ष अभय कुशवाहा, जिलाध्यक्ष शौकत अली, महानगर अध्यक्ष राजकुमार बर्णवाल और अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष शिवनाथ निराला सहित अन्य नेता लगातार इन क्षेत्रों में यही बता रहे हैं कि नीतीश कुमार ने सात निश्चय योजना से लेकर विकास के तमाम मुद्दों पर किस तरह फोकस किया। सम्मेलन में भी इन्हीं बातों पर जोर होगा। गया संसदीय क्षेत्र एनडीए के घटक दल भाजपा के कब्जे में है, जबकि विधानसभा क्षेत्र टुकड़ों में बंटा है। लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत सबसे अधिक चार विधानसभा सीटे राजद के पास हैं। बेलागंज, बाराचंट्टी, अतरी और बोधगया में राजद, वजीरगंज में कांग्रेस, टिकारी और शेरघाटी में जदयू, गया शहर और गुरुआ में भाजपा और इमामगंज में हम पार्टी काबिज है। इस स्थिति में जदयू के दो विधायकों पर अपने क्षेत्र से सम्मेलन में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने की भी चुनौती है।

Posted By: Jagran

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