गया । अगर श्राद्ध का महाकुंभ कहीं नजर आता है तो वह है गयाधाम। यह वही स्थान है, जहां लोग दूरदराज से अपने पूर्वजों का श्राद्ध करने प्रत्येक पितृपक्ष में आते हैं। यहां आकर अपने पितरों के मोक्ष की कामना को लेकर पिंडदान और तर्पण करते हैं। पितृपक्ष के तीसरे दिन रविवार को उत्तर मानस सरोवर पर पिंडदानियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कर्मकांड एवं तर्पण किया। सूर्य उदय के साथ ही उत्तर मानस सरोवर में पिंडदानियों आने लगे। देखते-देखते पूरा सरोवर परिसर पिंडदानियों से पट गया।

कर्मकांड को लेकर पिंडदानी अपने साथ जौ का आटा, चावल, तिल, फल, दूध, घी, पीतल का बर्तन, वस्त्र आदि सामग्री के साथ पहुंचे। यहां सरोवर के पवित्र जल में तर्पण कर कर्मकांड की विधि प्रारंभ किया। पिंडदानी सरोवर के तट पर बने शेड में बैठक कर कर्मकांड कर रहे थे। इसके अलावा फल्गु नदी में बने पंडाल में भी पिंडदान कर रहे थे। गयपाल पुरोहितों द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ कर्मकांड की विधि संपन्न कराई जा रही है। गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा पंडाल में कई पंखे लगाए गए हैं। इसके नीचे बैठ कर पूर्वजों की तस्वीर आगे रखकर पिंडदानी कर्मकांड कर रहे हैं। कर्मकांड की विधि संपन्न होने के बाद पिंड को पवित्र सरोवर के जल में प्रवाह कर रहे थे।

वहीं, सरोवर में अधिक पानी को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया है। सरोवर में एनडीआरएफ के जवान मुस्तैद थे। उनके द्वारा बार-बार पिंडदानियों को सूचित किया जा रहा था कि सरोवर के गहरे पानी नहीं जाएं। सरोवर में पानी अधिक है। जगह-जगह पुलिस बल की भी तैनाती है, जो पिंडदानियों को तर्पण करने में सहयोग कर रहे थे। साथ ही सीढि़यों के अलावा सरोवर में नहीं जाने के लिए चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं।

Posted By: Jagran

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