जागरण संवाददाता, गयाः सनातन धर्म में गया जी का काफी महत्व है। क्योंकि संसार में पिंडदान का सबसे महत्वपूर्ण भूमि गयाजी है। जहां कर्मकांड करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी उद्देश्य से तीर्थयात्री गयाजी में सालों आते हैं। लेकिन पितृपक्ष का महत्व कुछ विशेष है। पितृ पक्ष में कर्मकांड करने से पितरों के मोक्ष के साथ मुक्ति भी मिलती है। जिसके कारण पितृ पक्ष में काफी संख्या में तीर्थयात्री गयाजी आते हैं और अपने पितरों के नाम कर्मकांड कर मोक्ष दिलाते हैं। पितृ पक्ष शेष दो दिन बचे हैं।

वैतरणी में हो रहा गोदान

17 दिवसीय गया श्राद्ध का 15 वें दिन यानी शनिवार को शहर के प्राचीन सरोवर वैतरणी  में गोदान पिंडदानी कर रहे हैं। सरोवर पर सुबह से ही भीड़ देखी जा रही है। जहां पिंडदानी अपने पितरों के स्वर्ग लोक जाने को लेकर गोदान कर रहे हैं। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने गया क्षेत्र में वैतरणी नदी को पितरों उतारने के लिए यमलोक से अवतरित करवाया था। इस तर्पण से 21 कुलो का उद्धार होता है। गोदान एवं तर्पण के बाद पिंडदानी पास में स्थित मारकंडे महादेव का दर्शन एवं पूजन कर रहे हैं। 

सुबह से ही सरोवर पर तीर्थयात्री की भीड़

गोदान एवं तर्पण को लेकर सुबह से ही सरोवर पर तीर्थ यात्रियों की भीड़ देखी जा रही हैं। सूर्योदय के साथ ही तीर्थयात्री सरोवर के पवित्र जल से तर्पण करने के बाद गोदान कर रहे हैं।

17 दिवसीय कर्मकांड करने वाले का संख्या अधिक

सरोवर पर 15 एवं 17 दिवसीय कर्मकांड करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक देखी जा रही है। जहां गाय के पूछ पकड़ कर गोदान कर रहे हैं। साथ ही तीर्थ पुरोहित को पैर पूजा भी कर रहे हैं। पूरा सरोवर परिषद वैदिक मंत्र उच्चारण से गूंज रहा है। 

Edited By: Prashant Kumar Pandey

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