बिहार: IITians का हब बनी बुनकरों की ये बस्ती, JEE एडवांस में इस साल 6 छात्रों ने लहराया परचम
मानपुर की पटवा टोली, जो कभी बुनकरों की बस्ती थी, अब आईआईटीयंस के हब के रूप में पहचानी जाती है। ...और पढ़ें
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पटवा टोली के 6 छात्र सफल। फाइल फोटो
HighLights
पटवा टोली से 6 छात्रों ने जेईई एडवांस पास किया।
बुनकरों की बस्ती अब इंजीनियरों के हब के रूप में प्रसिद्ध।
सामुदायिक व्यवस्था और 'वृक्ष बी द चेंज' का अहम योगदान।
संवाद सूत्र, जागरण, मानपुर (गया)। आइआइटीयंस का हब बन चुकी पटवा टोली में इस वर्ष भी छह विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस में सफलता प्राप्त की है। करीब दो दशकों से इसके प्रति जो वातावरण बना है, वह निरंतर जारी है। पटवा टोली कभी बुनकरों की बस्ती के रूप में जानी जाती थी, जिसकी पहचान अब इंजीनियरों की बस्ती के रूप में है।
यहां के विद्यार्थी जेईई जैसी परीक्षा में सफल हो सकें, इसके लिए बस्ती में अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। सामुदायिक व्यवस्था की गई है, भवन बनाया गया है, जहां वे अध्ययन कर सकें।
जो परीक्षा में सफल होकर पढ़ाई कर रहे हैं या विभिन्न जगहों पर नौकरी में हैं, वे जूनियरों के लिए मेंटर का काम करते थे। यह आनलाइन होता है और जब वे छुट्टियों में घर आते हैं तो ऑफलाइन। यानी, मार्गदर्शकों की कोई कमी नहीं है। इस बार भी आधा दर्जन विद्यार्थी सफल हुए हैं।
अभिषेक की आल इंडिया रैंक 1299 है। अगस्त्य की रैंक 6733 है। स्पंदन, विद्या, ओम तथा एड्रिजा ने भी सफलता प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया है। इसमें यहां की सामाजिक संस्था 'वृक्ष बी द चेंज' की बड़ी भूमिका है, जिसकी नींव ही इसके लिए रखी गई थी। इसके संस्थापक चंद्रकांत पाटेश्वरी बताते हैं कि स्थानीय शिक्षक व समाज के लोगों के सहयोग से बच्चों को मार्गदर्शन मिलता रहता है।
कुलदीप और सुनील ने बच्चों पर काफी परिश्रम किया है। समाजसेवी मुन्ना पटवा ने सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पटवा टोली की यह उपलब्धि पूरे मानपुर और गया जिले के लिए गर्व का विषय है।
यहां के कई विद्यार्थी ऐसे परिवारों से आते हैं, जिनके माता-पिता पारंपरिक रूप से बुनकर हैं या छोटे व्यवसाय से जुड़े हैं। अब यहां एक नई बयार बह रही है।
