उपेन्द्र कश्यप, दाउदनगर (औरंगाबाद)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयंती को 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। दाउदनगर की भी यादें  नेताजी से जुड़ी हैं। वे 82 वर्ष पूर्व 9-10 फरवरी 1939 को यहां चतुर्थ गया जिला राजनैतिक सम्मेलन में कोलकाता से पहुंचे थे। दाउदनगर-बारुण रोड में स्थित सुभाष आदर्श उद्योग मंदिर चौरम में कार्यक्रम हुआ था। यहां अब जाकर उनकी प्रतिमा लगने का सपना पूरा हो रहा है।

नौ या दस फरवरी को होगा प्रतिमा का अनावरण

यहां प्रतिमा स्‍थापित कर दी गई है। मुखिया प्रतिनिधि अजीत कुमार बताते हैं कि जिस तिथि को नेताजी आए थे। उसी दिन प्रतिमा अनावरण का प्रयास है। ऐसा हुआ तो 9 या 10 फरवरी को तेजस्वी यादव से इसका अनावरण कराया जाएगा। चौरम निवासी मोहन सिंह बहुत खुश हैं। कहते हैं कि इस स्थान का महत्व पहली बार दैनिक जागरण ने लोगों को बताया था। आयोजन से जुड़ी यादें कोलकाता संग्रहालय में सुरक्षित हैं। एक स्मृति चिह्न बड़े जतन से विजय यादव ने संभाल रखा था। इनका जन्म 1956 में हुआ था लेकिन इनके पिता राजपति सिंह जो आजीवन सरपंच और भूदान कमेटी के सदस्य रहे थे, उन्‍होंने आयोजन से संबंधित यादें उनसे साझा की थी। विजय ने ही स्मृति चिह्न उपलब्ध करवाया था। मोहन सिंह के अनुसार तब यहां 12 दिनों तक मेला लगा था। मीना बाजार उसका मुख्य आकर्षण था। आयोजन की अध्यक्षता किसान नेता सहजानंद सरस्वती ने की थी। कुमार नरेंद्र देव जैसे प्रख्यात दिग्गजों ने सभा को संबोधित किया था।

यहां राजनीति का ककहरा सीखते थे आजादी के दीवाने

आयोजन में नेता जी ने अंग्रेजों को ललकारते हुए कहा था कि वे रोज गोली चला रहे हैं, यह अब बर्दाश्त से बाहर हो गया है। उन्‍होंने 'तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा' का नारा बुलंद किया था। यह वही चौरम आश्रम है जहां आजादी के दीवाने राजनीति का पाठ पढ़ते थे। ऐसे लोगों में पूर्व मंत्री (अब स्वर्गीय) रामनरेश सिंह, रामविलास सिंह, राम नारायण सैनिक, केशव सिंह, जगेश्वर दयाल सिंह, जगदेव लाल केशरी शामिल थे। कुमार बद्री नारायण की जमींदारी में बसा चौरम तब कितना महत्वपूर्ण था इसका आकलन लगाया जा सकता है कि तत्कालीन गया जिला और वर्तमान मगध प्रमण्डल में चौरम को राजनैतिक जिला सम्मेलन के लिए चुना गया। 

और किसानों को मिली थी जमींदारी से मुक्ति

इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता यह रही थी कि सैकड़ों किसानों को जमींदारी से मुक्ति मिली थी। कुमार बद्री नारायण ने अपनी चार सौ बिगहा जमीन किसानों के बीच बांट दी थी। इस स्थल को संरक्षण की जरूरत थी लेकिन शिलान्यास के कई पत्थर जमींदोज हो गए। जमीन का बड़ा हिस्सा बेच दिया गया या अतिक्रमित कर ली गई। मात्र पांच एकड़ जमीन जो स्कूल खोलने के लिए बिहार के राज्यपाल के नाम निबंधित है वही बचा हुआ है। इस जमीन पर भी पक्का निर्माण हुआ है।

 

kumbh-mela-2021

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप