संवाद सूत्र, चैनपुर (कैमूर)। कैमूर जिले के लिए मंगलवार बड़ी खुशियां लेकर आया। यहां के चैनपुर विधायक को मंत्री का ताज मिला। वे अल्‍पसंख्‍यक विभाग के मंत्री बनाए गए हैं। जमां खान को मंत्री पद की शपथ लेते देखने के लिए क्षेत्र के सभी लोगों की आंखें टीवी स्‍क्रीन पर लगी थी।  नौघरा गांव में मंत्री की 80 वर्षीय माता सरवरी खातून भी टीवी देख रही थीं। बेटे को मंत्री बनता देख उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए।

वाराणसी से ग्रेजुएशन तक की शिक्षा ली है जमा खान ने

बता दें कि चैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम नौघरा के निवासी दीवान साहेब जमा खान एवं सरवरी खातून के पुत्र मो जमा खान का परिवार शिक्षित व समृद्ध परिवारों में गिना जाता है।  वाराणसी में जन्‍मे जमा खां की प्रारंभिक शिक्षा वहीं शुरू हुई। लेकिन बाद में ये कैमूर आ गए। भभुआ शहर के एक निजी स्‍कूल में एडमिशन कराया। इन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वाराणसी में इंटर तक की पढ़ाई की। वाराणसी में ही डीएवी से ग्रेजुएशन किया। उस दौरान वह छात्र नेता के रूप में सक्रिय हो गए थे। 

 

छात्र जीवन से की राजनीतिक सफर की शुरुआत

जमा खान का राजनीतिक सफर इनके विवाह के बाद शुरू हुआ। राजनीति के क्षेत्र में पहला कदम 2002 में जिला परिषद चुनाव में रखा। हालांकि उस चुनाव में इन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। जिसके बाद चैनपुर विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट से वर्ष 2005 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा। हार का सामना करना पड़ा। मगर घर परिवार का सहयोग एवं क्षेत्र के मतदाताओं का सहयोग लगातार इनके साथ रहा। उसी का नतीजा  रहा कि बार-बार हार के बावजूद हिम्‍मत नहीं हारी। वर्ष 2020 में बहुजन समाज पार्टी के ही टिकट पर चैनपुर विधानसभा सीट से 97,000 हजार वोट पाकर विजय प्राप्त हुए। मंत्री पद पर रह चुके बीजेपी के प्रत्याशी बृजकिशोर बिंद को लगभग 26,000 वोटों से हराया। क्षेत्र के विकास के लिए इन्होंने जदयू का दामन थाम लिया। जिसके बाद मंगलवार 9 फरवरी को मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान मंत्री पद के लिए शपथ ग्रहण किए।

 

शिक्षित संभ्रांत परिवारों है शुमार 

जमा खान की पत्‍नी गृहणी हैं। पांच बहनों में इकलौते भाई जमा खान की चार पुत्रियां एवं एक पुत्र  है। सबसे बड़ी पुत्री दिल्‍ली यूनिवर्सिटी में है। दूसरी बीएचयू में 11वीं कर रही  है। तीन बच्चे एक पुत्र एवं दो पुत्रियां चांद मानव भारती में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। इनके नाना भी डॉक्टर थे। उन्‍होंने अपनी पुत्री सरवरी खातून को अंग्रेजी एवं हिंदी की उच्च शिक्षा दिलवाई थी। ता दीवान साहेब जमा खान एक संपन्न किसान हैं। 

 

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