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कभी कॉपी-किताब के लिए तरसती थी मजदूर की बेटी, आज पुलिस की वर्दी पहन गोपालगंज में दे रही हैं सेवा

Published: Thu, 05 Nov 2026 01:19 PM (IST)

गया की फुलमन्ती कुमारी ने गरीबी और संसाधनों की कमी के बावजूद अपने शिक्षक के मार्गदर्शन से बिहार पुलिस में ...और पढ़ें

गुरु के भरोसे को बनाया ताकत

गुरु के भरोसे को बनाया ताकत

HighLights

  1. गरीबी और संघर्ष के बावजूद फुलमन्ती बनीं पुलिस अधिकारी।

  2. शिक्षक नरेश भारती के मार्गदर्शन ने सपनों को दी उड़ान।

  3. गोपालगंज में पुलिस सेवा देकर बनीं गांव की प्रेरणा।

संवाद सूत्र, फतेहपुर (गया)। गया के एक छोटे से गांव में कभी ऐसी बेटी भी थी, जिसके लिए कॉपी-किताब जुटाना तक आसान नहीं था। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, पिता मजदूरी कर परिवार का पेट पालते थे और संसाधनों की कमी हर कदम पर चुनौती बनकर खड़ी थी।

लेकिन बेटी ने हालात के आगे हार नहीं मानी। आज वही फुलमन्ती कुमारी पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

उनकी सफलता के पीछे सालों का संघर्ष ही नहीं, बल्कि एक शिक्षक का वह भरोसा भी है, जिसने उनके सपनों को नई उड़ान दी।

पिता करते थे मजदूरी, बेटी ने आंखों में पाल रखा था बड़ा सपना

गया जिले की कठौतिया केवाल पंचायत के बधबंदवा गांव निवासी राजेंद्र मांझी की बेटी फुलमन्ती का बचपन आर्थिक तंगी के बीच गुजरा। परिवार की आमदनी का मुख्य जरिया पिता की मजदूरी थी।

ऐसे में घर की जरूरतों के साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी आसान नहीं था। कई बार पढ़ाई के लिए जरूरी कॉपी-किताब जुटाना मुश्किल हो जाता था, लेकिन फुलमन्ती ने शिक्षा का रास्ता नहीं छोड़ा।

शिक्षक ने पहचानी प्रतिभा, माता-पिता को भी समझाया

फुलमन्ती की जिंदगी में नया मोड़ तब आया, जब शिक्षक नरेश कुमार भारती ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। वर्ष 2018-19 में मैट्रिक की पढ़ाई के दौरान शिक्षक ने उनके माता-पिता से मुलाकात की और बेटी को आगे पढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि फुलमन्ती में आगे बढ़ने का जुनून है और सही अवसर मिलने पर वह अपनी पहचान जरूर बनाएगी।

गुरु के भरोसे को बनाया ताकत, लगातार हासिल की कामयाबी

शिक्षक के प्रोत्साहन ने फुलमन्ती के आत्मविश्वास को मजबूत किया। उन्होंने मैट्रिक के बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की और वर्ष 2022 में स्नातक की डिग्री हासिल की।

इसके बाद उन्होंने पुलिस में भर्ती होने का लक्ष्य तय किया। आर्थिक परेशानियां थीं, संसाधन सीमित थे, लेकिन उन्होंने तैयारी जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और पहली ही कोशिश में बिहार पुलिस की लिखित परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।

27 जून 2025 को मिली पुलिस की वर्दी, गोपालगंज में संभाली जिम्मेदारी

लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद फुलमन्ती ने प्रशिक्षण पूरा किया। इसके बाद 27 जून 2025 को उन्होंने गोपालगंज जिला पुलिस में योगदान दिया।

कभी जिस परिवार के लिए पढ़ाई के संसाधन जुटाना भी चुनौती था, आज उसी परिवार की बेटी पुलिस की वर्दी पहनकर समाज की सेवा कर रही है। यह बदलाव उनके परिवार के लिए गर्व और पूरे गांव के लिए प्रेरणा का विषय है।

सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरु को

फुलमन्ती अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता के विश्वास और शिक्षक नरेश कुमार भारती के मार्गदर्शन को देती हैं। वह अपने गुरु को पिता समान मानती हैं।

उनका कहना है कि गुरुजी ने केवल पढ़ाई में मदद नहीं की, बल्कि कठिन परिस्थितियों में हौसला बनाए रखने की ताकत भी दी। आज भी वह उनके योगदान को कृतज्ञता के साथ याद करती हैं।

गांव की बेटियों के लिए बनीं उम्मीद की मिसाल

फुलमन्ती की कहानी सिर्फ एक सरकारी नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है। यह उस भरोसे की जीत है, जो एक शिक्षक ने एक साधारण परिवार की बेटी पर जताया था।

उनकी कामयाबी बताती है कि आर्थिक तंगी सपनों का रास्ता रोकने की वजह नहीं बननी चाहिए। सही मार्गदर्शन, मेहनत और परिवार का साथ मिले तो छोटे से गांव की बेटी भी बड़ी मंजिल हासिल कर सकती है।

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