बिहार में महिला मुखिया की सूखे के खिलाफ जंग, 74 तालाबों से बदली झाझ गांव की तस्वीर
बाराचट्टी प्रखंड की झाझ पंचायत में मुखिया शोभा कुमारी ने जल संकट से निपटने के लिए मनरेगा के तहत 74 तालाबों का निर्माण कराया है।

महिला मुखिया शोभा कुमारी। फोटो जागरण
HighLights
मुखिया शोभा कुमारी ने जल संरक्षण को बनाया एजेंडा।
मनरेगा के तहत 74 तालाबों का हुआ निर्माण।
भू-जल स्तर सुधरा, खेती और आय में वृद्धि।
अमित कुमार सिंह, बाराचट्टी (गया)। गया जिला अंतर्गत बाराचट्टी प्रखंड के झाझ पंचायत क्षेत्र मे गर्मी आते ही पानी के लिए त्राहिमाम मचता था।
इंसान किसी तरह पीने के पानी का इंतजाम कर लेते थे, लेकिन बेजुबान पशुओं को नाली और गड्ढों में जमा दूषित पानी पीना पड़ता था।
बाराचट्टी प्रखंड की झाझ पंचायत के चोरदाहा, मोढ़ी और तुलाचक जैसे सुदूरवर्ती गांवों में ग्रामीण नदी-नालों में गड्ढे खोदकर पानी जुटाते थे। गिरते भू-जल स्तर से खेती और पशुपालन दोनों प्रभावित थे।
इस संकट को गंभीरता से लेते हुए पंचायत कि युवा महिला मुखिया शोभा कुमारी ने जल संरक्षण को पंचायत के विकास का प्रमुख एजेंडा बनाया। इसमें सबसे ज्यादा मदद महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना इस विकास कि रीढ़ बनी।
ग्रामसभा से शुरू हुई मुहिम
मुखिया शोभा कुमारी ने जल संकट को केवल गर्मी की समस्या नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौती के रूप में देखा। उन्होंने वर्षा जल को सहेजने और भू-जल स्तर को संभालने के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया।
ग्रामसभा में तालाब निर्माण के प्रस्ताव आए। पंचायत समिति से मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ी और मनरेगा की कार्ययोजना में तालाब निर्माण को प्राथमिकता मिली और मुखिया के लिए बीते चार वर्षों मे भाग भू-जल स्तर को रोकना कार्य योजना के प्राथमिकता मे रहा इतना ही नही ग्रामीणों की भागीदारी से यह पहल लगातार आगे बढ़ी।
तालाबों से खेतों में लौटी हरियाली
झाझ पंचायत के छह गांवों में 74 तालाबों का आंकड़ा सामने आया है। वर्षा जल को रोकने की इस पहल से खेती को सहारा मिला है। पहले पानी के अभाव में परती रहने वाली जमीन पर अब किसान धान, गेहूं और मक्का की फसल उगा रहे हैं।
सिंचाई की सुविधा से खेतों में हरियाली लौटी है और किसानों के लिए आमदनी के अवसर बढ़े हैं। कठौतिया के कमलदेव यादव और रामजीत यादव, मंसाडीह के जयराम यादव और राजेश उर्फ गोरा यादव, चोरदाहा के नरेश मांझी तथा धमना के देवकुमार विश्वकर्मा और ललेश कुमार जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, तालाबों से खेती के लिए पानी जुटाने में मदद मिली है। किसानों का कहना है कि तालाबों का नियमित रखरखाव और नए जलस्रोतों का संरक्षण जरूरी है, ताकि गर्मियों में भी पानी की उपलब्धता बनी रहे।
झाझ पंचायत के छह गांवों में 74 तालाब
| ग्राम | तालाब की संख्या |
|---|---|
| कठौतिया | 22 |
| मंसाडीह | 20 |
| चोरदाहा | 18 |
| तुलाचक | 05 |
| धमना | 04 |
| महुआइन | 05 |
| कुल | 74 |
युवा मुखिया का नेतृत्व बनी मिसाल
वर्ष 2007 में झाझ पंचायत को सरकार ने आदर्श पंचायत के रूप में चयनित किया था। अब शोभा कुमारी की जल संरक्षण पहल विकास को नई दिशा देने का प्रयास है।
उनकी कहानी बताती है कि युवा नेतृत्व केवल नए विचारों तक सीमित नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीणों और सरकारी व्यवस्था को साथ लाने का नाम भी है।
ग्रामसभा, पंचायत समिति और मनरेगा की कार्ययोजना के सहयोग से आगे बढ़ी यह मुहिम बताती है कि बारिश की हर बूंद सहेजकर जल संकट कम किया जा सकता है।
हालांकि, तालाबों की जलधारण क्षमता, लाभान्वित परिवारों और गर्मियों में भू-जल स्तर में आए बदलाव के आंकड़े जुटाना जरूरी है। जलस्रोतों का संरक्षण और तालाबों का रखरखाव ही इस पहल को स्थायी सफलता दिला सकता है।
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