भभुआ (कैमूर), संवाद सहयोगी। कैमूर जिले में कोरोना (CoronaVirus) बेकाबू हो चुका है। जिले में 400 के आसपास एक्टिव मरीज हो गए हैं। जिस प्रकार जिला में कोरोना काबू में नहीं है, ठीक उसी प्रकार बाजार में महंगाई भी बेकाबू हो गई है। प्राय: हर सामान की कीमत आसमान छू रही है। राशन से लेकर रसोई गैस तक महंगी हो गई है। लेकिन सरसों के तेल में तो जैसे आग लगी हुई है। फरवरी माह तक 140 रुपये प्रति लीटर तक बिकने वाले तेल की कीमत 180 से 200 रुपये तक पहुंच गई है।  

छौंक लगाना भी हो गया है महंगा 

सरसों के तेल के साथ साथ अलसी (तिसी) का तेल ने भी अपना तेवर दिखाते हुए 220 रुपये लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे में कड़ाही में छौंका लगाने वाला तेल अब आम लोगों के लिए महंगा पड़ रहा है। बाजार में रिफाइंड भी 150 रुपये लीटर के आसपास पहुंच चुका है। तेल के साथ साथ दाल भी अपना भाव दिखा रहा है। अरहर की दाल 80 रुपये किलो तक बिकती थी, अब वो 120 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। अरहर के दाल के साथ साथ चना दाल, मुंग दाल, उड़द दाल , मसूर का दाल भी आमजन की जेब पर भारी पड़ रहा है। मसाले भी  कहां पीछे रहने वाले थे। मसालोंं में हल्दी, धनिया, जीरा, मरीच, अजवाईन,  तेजपत्ता, आदि कई चीजों की कीमतों मे थोड़ी बहुत बढ़ोतरी हुई है।

गैस के दाम से भी लोगों में परेशानी

बाजारों में कई चीजों के बढ़ोतरी के साथ साथ उज्जवला योजना की आंच धीमी हो रही हैं। मुफ्त में मिलने वाला उज्जवला योजना का गैस सिलेंडर अब कई घरोंं में शोभा की वस्‍तु बना हुआ है। दरअसल जिले में गैस सिलेंडर की कीमत 920 रुपये होने के बाद गरीबों के घर में अब सिलेंडर नहीं पहुंच पा रहे हैं। गरीब तथा मध्यम वर्गीय कोरोना काल में किसी तरह परिवार चला रहे हैं। कोरोना के महामारी के वक्त में गैस का अधिक  दाम भी लोगों पर बोझ बनता जा रहा है। 

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