संवाद सहयोगी, मोहनियां (भभुआ)। अनुमंडल अस्पताल विवादों का अड्डा बन चुका है। लंबे समय से यहां चिकित्सकों के गुटबाजी से चिकित्सा सेवा प्रभावित हो रही है। जिससे मरीजों का नुकसान हो रहा है। मंगलवार को एक बार फिर चिकित्सकों की गुटबाजी सामने आई। जब उपाधीक्षक डा एके दास द्वारा बनाए गए ड्यूटी के रोस्टर पर चिकित्सकों ने सवाल उठाया। ड्यूटी छोड़कर चिकित्सक डीएस कार्यालय में पहुंचे। भीतर से दरवाजा बंद कर उपाधीक्षक के साथ बदसलूकी की। जो पूरे दिन अस्पताल में चर्चा का विषय बना रहा। चिकित्सकों के दुर्व्‍यवहार से क्षुब्ध उपाधीक्षक ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर पद से मुक्त कराने की गुहार लगाई है।

इस घटना पर नगरवासियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डीएस के साथ बदसलूकी करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध शासन प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। ज्ञात हो कि वर्तमान में डॉ अवधेश कुमार दास अनुमंडल अस्पताल मोहनियां के उपाधीक्षक हैं। कोरोना काल में उनके द्वारा तत्परता से किए गए कार्य की लोगों ने काफी सराहना की थी। बताया जाता है कि अनुमंडल अस्पताल में चिकित्सकों का दो गुट है। मनमानी करने वाले चिकित्सक उपाधीक्षक को पसंद नहीं करते। इसके कारण वे उनका काफी विरोध करते हैं। वे नहीं चाहते कि डा एके दास उपाधीक्षक रहे। पूर्व में भी ड्यूटी के रोस्टर को लेकर अस्पताल में विवाद हुआ था।

मंगलवार को एक बार फिर इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति हुई। भाजपा के वरिष्ठ नेता राणा प्रताप सिंह ने कहा कि डा अवधेश कुमार दास ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करते हैं। जिसे देखते हुए उन्हें अनुमंडल अस्पताल का उपाध्यक्ष बनाया गया है। कोरोना काल में उन्होंने सरहनीय कार्य किया था। अस्पताल में गुटबाजी के कारण चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जो अनुचित है। अनुमंडल अस्पताल में कुछ चिकित्सक लंबे समय से जमे हुए हैं। वे एक साजिश के तहत उपाधीक्षक को परेशान कर रहे हैं। उन पर गलत एवं बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। जिससे आजिज आकर वे डीएस का पद छोड़ दें। लेकिन, ऐसा होने नहीं होने दिया जायेगा।

मंगलवार को उपाधीक्षक के साथ चिकित्सकों ने जो बरताव किया उसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है। शीघ्र ही इस मामले को लेकर वे स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री से मिलेंगे। किसी भी कीमत पर अनुमंडल अस्पताल को गुटबाजी का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा। इससे मरीजों का नुकसान होगा। इस संबंध में जब उपाधीक्षक से पूछा गया तो उनके आंख से आंसू निकल गया। रुंधे हुए गले से कहा की इस घटना से उनकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। स्वाभिमान को ठेस लगी है। उनके साथ जो हुआ उसको शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

Edited By: Prashant Kumar