अमित कुमार सिंह, बाराचट्टी

प्रखंड मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर हाहेसाडी मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक कर्ज लेकर 412 विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध करा रहे हैं। मजबूरी में कीड़े लगे चावल को ही साफ कर बच्चों को परोसा जा रहा है। यह सब डेढ़ वर्ष से वित्तीय प्रभार नहीं मिलने के कारण हो रहा है। पैसे के अभाव में मध्याह्न भोजन के लिए कर्ज लेने के अलावा प्रधानाध्यापक के पास कोई और चारा नहीं है। वह कहते हैं हम बच्चों को भूखे पेट नहीं छोड़ सकते हैं।

25 फरवरी 2017 मध्य विद्यालय हाहेसाडी के प्रभारी प्रधानाध्यापक देवेन्द्र सिंह से प्रधानाध्यापक पद पर अंसार सईद ने योगदान लिए। इस दौरान देवेन्द्र सिंह ने वित्तीय छोड़कर स्कूल के सभी प्रभार अंसार को सौंप दिया। वित्तीय प्रभार नहीं मिलने से स्कूल के कई कार्य फंड के अभाव में नहीं हो रहे हैं।

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झाड़ियों की आड़

में करते हैं शौच

स्कूल के एक कोने में बने शौचालय भी जर्जर अवस्था में है। कब गिर जाएगा, कहा नहीं जा सकता है। ऐसे में अब स्कूल स्टाफ या विद्यार्थी इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं। मजबूरन सभी को बाहर ही शौच के लिए जाना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी शिक्षिका और बच्चियों को हो रही हैं। शौच के लिए स्कूल के बगल में उगी झाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है।

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एक वर्ष बाद भी नहीं

हुई समिति की बैठक

बीते वर्ष 14 फरवरी को विद्यालय शिक्षा समिति का चुनाव हुआ था। उसके बाद से समिति की बैठक प्रधानाध्यापकद्वारा नहीं कराया गया है। समिति की अध्यक्षा काति देवी बताती हैं, हेड सर हमको पहचानते भी नहीं हैं। वहीं, सचिव मंजू देवी कहती हैं, एक-दो बार बैठक हुई, लेकिन समिति के लोग आते ही नहीं हैं। अध्यक्ष व सचिव ने बताया कि चावल में कीड़े लगे हैं। बावजूद इसके उसी को पका कर बच्चों को खिलाया जा रहा है।

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वित्तीय प्रभार नहीं मिलने के कारण मैं कर्ज लेकर विद्यार्थी को मध्याह्न भोजन दे रहा हूं। चावल में कीड़े लगे हैं, यह सही है। इसी को ठीक से साफ कराकर बच्चों को दे रहे हैं। शौचालय कई वर्ष पहले से टूट चुका है। स्कूल के पास फंड नहीं है। सरकार जो व्यवस्था दी है, उसी में ड्यूटी दे रहे हैं। विद्यालय शिक्षा समिति की बैठक बीते महीने कराई गई थी, लेकिन कोई आए नहीं।

अंसार सईद, प्रधानाध्यापक

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Posted By: Jagran