जागरण संवाददाता, गया : पितरों के मोक्ष की कामना करते हुए राज्यपाल फागु चौहान ने मंगलवार को गया में पिंडदान किया। उसके बाद बोधगया में बुद्ध को नमन। शाम को वे पटना लौट गए। भाई शिवकुमार चौहान के साथ राज्यपाल ने पूर्वाह्न में विष्णुपद मंदिर के प्रागण में पिंडदान किया। कर्मकांड के बाद उन्होंने कहा कि यहां आकर आत्मिक शांति की प्राप्ति हो रही है। पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए मैंने भगवान से प्रार्थना की है। श्रीहरि विष्णु के चरण में शीश नवाकर असीम आनंद मिला है। तीर्थपुरोहित यानी गयापाल पंडा ने कर्मकांड संपन्न कराया। पंडा अमरनाथ धोकड़ी ने उनके सामने वह पोथी कर दी, जिसमें पिंडदानी हस्ताक्षर करते हैं। अपने से पहले पिंडदान के लिए गया आए अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी लेने के बाद राज्यपाल ने पोथी पर हस्ताक्षर किया। जिलाधिकारी अभिषेक सिंह भी उस दौरान उपस्थित रहे। मंगलवार पूर्वाह्न में राज्यपाल हवाई मार्ग से गया अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा पहुंचे। पुलिस-प्रशासन के बड़े अफसरों ने गुलदस्ता भेंटकर उनकी अगवानी की। हवाईअड्डा से राज्यपाल का काफिला सीधे विष्णुपद मंदिर पहुंचा। सड़क मार्ग में सुरक्षा के मद्देनजर विशेष प्रबंध रहे। वरीय पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा खुद कमान संभाले हुए थे। पिंडदान के बाद अपने काफिले के साथ राज्यपाल बोधगया निकल गए। वहां भोजन के बाद होटल रॉयल रेजिडेंसी में कुछ देर विश्राम किया। दोपहर दो बजे के बाद उन्होंने महाबोधि मंदिर में गौतम बुद्ध को नमन कर शांति की काम की। मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना कर बोधिवृक्ष को नमन किया। उसके बाद साधना उद्यान में शाति घटा बजाया। मंदिर परिसर का जायजा लेने के बाद वे संतुष्ट दिखे। बोगधया में राज्यपाल ने महाबोधि इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पाली एंड बुद्धिस्ट स्टडीज का उद्घाटन किया। अनागरिक धम्मपाल जयंती के उद्धाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कहा कि बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में धम्मपाल की महती भूमिका रही है। वे सच्चे मायने में बौद्ध धर्म के रक्षक थे। इसी के साथ उन्होंने कामना की बोधगया पूरे विश्व को सदैव शांति का संदेश देता रहेगा। समारोह के संपन्न होने के बाद राज्यपाल हवाई मार्ग से पटना के लिए प्रस्थान कर गए।

Posted By: Jagran

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